कवर्धा:  कोरोना संक्रमण की रोकथाम में  जिला अव्वल, कारगर साबित हुआ नेगेटिव रिपोर्ट फॉर्मूला


कवर्धा। कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के मामले में कवर्धा जिला राज्य में अव्वल स्थान पर आ गया है। यहां पर सबसे कम समय के लिए लॉकडाउन लगाए जाने के बावजूद जिले में कोविड संक्रमण पर नियंत्रण की दर 1.4 प्रतिशत पर आ पहुंची है। यहां कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के हालात अब काफी हद तक नियंत्रण में हैं। इसके लिए जिला प्रशासन के विभिन्न निर्णयों तथा स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लॉकडाउन के पहले कोविड नेगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता हो या स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला प्रशासन के विभागीय अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सौपने का निर्णय, कलेक्टर की कार्ययोजना को लोग अब बखूबी समझने लगे हैं।


कोरोना नियंत्रण के लिए जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ स्मार्ट व त्वरित निर्णय भी लिए जा रहे हैं, इसके परिणाम स्वरूप ही वर्तमान में जिला, राज्य भर में कोरोना नियंत्रण के मामले में अव्वल स्थान पर है। ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, जिले में 286 आरटीपीसीआर जांच में 3 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। इसी तरह 229 ट्रू-नॉट टेस्ट में 9 व 2,216 एंटीजन टेस्ट में 23 संक्रमित मरीज मिले। यानी कुल 2,512 जांच के मुकाबले पाजिटीविटी का आंकड़ा मात्र 1.4 प्रतिशत रहा, जो जिले की जनता के लिए काफी राहत भरा है। इस संबंध में कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा ने कहा है, कवर्धा (कबीरधाम) जिले में कोरोना संक्रमण की दर 1.4 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो जिले के लिए राहत भरी खबर है। यह आंकड़ा राज्य भर में कवर्धा जिले की सबसे अच्छी स्थिति को दर्शाता है। हमें एकजुट होकर इस स्थिति को बनाए रखना है। उम्मीद है हमारा कबीरधाम आने वाले समय में भी इसी तरह सुरक्षित रहेगा, इसके लिए आप सभी का सहयोग मिलता रहेगा।


तब जाकर मिली सफलता…

  • जिला प्रशासन द्वारा जिले में आपातकाल से निपटने के लिए लगातार आवश्यक सामग्री, जीवनदायनी दवाएं और अस्पताल स्टाफ की व्यवस्था कराई गई।
  • जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण जनों के लिए लोकाचार जारी कर शादी, जन्म या मृत्यु के संबंध में ग्राम सरपंच, सचिवों व कोटवारों के माध्यम से जानकारी लेकर ऐसे घरों के लोगों को समझाइश देने व 10 से अधिक लोगों के किसी कार्यक्रम में शामिल न होने व जांच कराकर ही कार्यक्रम करने का निर्णय भी ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना नियंत्रण के लिए कारगर रहा।
  • कोरोना जांच बढ़ाने के लिए घर से बाहर निकलने पर और बॉर्डर पर कोरोना की नेगेटिव जांच रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया। हालांकि, शुरुआत में इसकी आलोचनाएं भी हुई, लेकिन जनता को इसका महत्व समझ आया और इस निर्णय को लोगों ने अपनाया भी। परिणाम स्वरूप आपातकाल की स्थिति अपेक्षाकृत कम है व स्थिति नियंत्रण में है।मितानिन, एएनएम और जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से लगातार डोर टू डोर सर्वे कराया गया व लगभग 15 हजार दवा किट का वितरण भी किया गया।
  • मितानिन, एएनएम और जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से लगातार डोर टू डोर सर्वे कराया गया व लगभग 15 हजार दवा किट का वितरण भी किया गया।

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