By।शिवचरण सिन्हा

1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक प्रस्ताव के तहत विश्व तंबाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड नो टोबैको डे) मनाने का निर्णय लिया था

फाइल फोटो

दुर्गुकोंदल:- 31 मई को दुनिया भर में हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य तंबाकू सेवन के व्यापक प्रसार और नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करना है, जो वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है।1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक प्रस्ताव के तहत विश्व तंबाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड नो टोबैको डे) मनाने का निर्णय लिया गया था. निर्णय के तहत ही हर साल 31 मई को अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत सरकार ने 2003 में एक अधिनियम पारित किया था, जिसके तहत कहा गया था कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान नहीं करेगा. इनमें सभागृह, भवनों,रेलवे स्टेशन, पुस्तकालय, अस्पताल, रेस्तरां, कोर्ट, स्कूल, कॉलेज आदि आते हैं. समय-समय पर इन नियमों में सुधार किए जाते रहे हैं. आजकल सभी सार्वजनिक स्थलो पर धूम्रपान निषेध है।तंबाकू एवं अन्य तंबाकू उत्पाद- गुटखा, खैनी, जर्दा, तंबाकू वाले मसाले, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चुरट, सिगार 18 साल से कम के लोगों के लिए प्रतिबंधित है।450 ग्राम तम्बाकू में निकोटीन नामक जहर की मात्रा लगभग 22 ग्राम से ज्यादा होती है।

तम्बाकू से नुकसान


योग शिक्षक संजय वस्त्रकार का मानना है कि तम्बाकू से दांत कमजोर पड़ जाते हैं और समय से पहले ही गिर जाते हैं. इसके सेवन से दंत रोग हो जाते हैं.आंखों की ज्योति कम हो जाती है,आदमी बहरा और अन्धा हो जाता है।व्यक्ति नपुंसक भी हो सकता है।फेफड़ों की टीबी हो जाती है, जो मनुष्य को सब प्रकार से बर्बाद कर देती है और मृत्य को निकट ला देती है। तम्बाकू के निकोटीन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, रक्त संचार मंद पड़ जाता है,अत: तम्बाकू निषेध दिवस पर प्रत्येक धूम्रपान करने वाले को उसका प्रयोग नहीं करने का संकल्प लेना ही चाहिए।जब धूम्रपान करते हैं तो उसका धुंआ पूरे श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. जिसका प्रभाव अन्धपन और श्रवण ह्रास के रूप में प्रकट हो सकता है.  इसका सीधा सम्बन्ध मुंह से ही होता है, इससे दांतों में विकार, मसूड़ों में विकार और मुख कैंसर होने की पूरी-पूरी संभावना बन जाती है।शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है मस्तिष्क, जिससे कि सम्पूर्ण शरीर का संचालन होता है, तंबाकू में अवस्थित निकोटिन मनुष्य को अपना आदी बना लेता।तम्बाकू सेवन करने वाली महिलाओं में गर्भपात की दर सामान्य महिलाओं से तक़रीबन 15 फीसदी अधिक होती है. तम्बाकू सेवन के कारण महिलाओं में फेफड़ो का कैंसर,दिल का दौरा, सांस की बीमारी ,प्रजनन सम्बन्धी विकार, निमोनिया ,माहवारी से जुडी समस्याएं अधिक उग्र हो जाती है।तंबाकू चबाने से और सिगरेट पीने से मुंह, फेफड़े, गले, पेट, गुर्दे, मूत्राशय एवं यकृत का कैंसर, जबड़ों का बंद होना, दिल की बीमारी, मसूढ़ों की बीमारी, पैरों में गैगरिन, ब्रेन अटैक, क्राॅनिक ब्रोंकाइटिल, निमोनिया, उच्च रक्तचाप, लकवा, अवसाद, नपुंसकता, ऊर्जा में कमी आदि क्राॅनिक बीमारियां जन्म ले रही हैं।


विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2021की थीम “छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध” हैं. ये अभियान लोगों को स्वस्थ जीवन के लिए तंबाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है. लोगों को इसके हानिकारक प्रभावों को समझाने के लिए WHO के जरिए जागरूकता पैदा करने के लिए कई प्रदर्शनियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. हालांकि, पिछले साल की तरह, इस साल भी, चल रहे COVID-19 महामारी की वजह से कोई सार्वजनिक अभियान नहीं होगा. लेकिन लोग एक वर्चुअल इवेंट ऑर्गेनाइज कर सकते हैं जिसमें वो लोगों को खेल या रीयल-लाइफ की कहानियों के जरिए शिक्षित कर सकते हैं।


मौजूदा समय मे गुटखा और सिगरेट का सेवन करने वालों को कोरोना संक्रमण होने का खतरा ज्यादा है. खैनी, गुटखा खाने वाले लोग कई गैरसंचारी रोगों के भी आसानी से शिकार बन जाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) और शोधकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है कि तम्बाकू से कमजोर हुए फेफड़े कोरोना को संक्रमण का दायरा बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं।रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू में जहरीले केमिकल मिले होते हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे सेवन करने वाले व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।आइए इस महत्वपूर्ण अवसर पर तंबाकू मुक्त वातावरण तैयार करने का संकल्प ले और इनके उत्पाद को बंद करने की दिशा में सकारात्मक पहल करे।

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