दुर्गुकोंदल: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक

By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक होता है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को ये त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं। ये संयोग भाई-बहन के लिए बहुत शुभ साबित होंगे। इस साल रक्षाबंधन 22 अगस्त दिन रविवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर शोभन योग बन रहा है, 22 अगस्त की सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक शोभन योग रहेगा।ये योग मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस योग के दौरान की गई यात्रा बहुत कल्याणकारी साबित होती है।इसके साथ ही इस दिन शाम को 7 बजकर 40 मिनट तक घनिष्ठा योग रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, घनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इस नक्षत्र में जन्में लोगों का अपने भाई-बहन के प्रति विशेष प्रेम होता है।इसलिए इस नक्षत्र में रक्षाबंधन का पड़ना भाई-बहन के आपसी प्रेम को बढ़ाएगा।इस बार भद्राकाल न होने की वजह से दिनभर में किसी भी समय राखी बांधी जा सकती है।


रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

सुबह 07.42 बजे से 09.17 बजे तक (चर)
: सुबह 09.18 बजे से 10.52 बजे तक (लाभ)
: सुबह 10.53 बजे से दोप. 12.27 बजे तक (अमृत)
: दोपहर 02.02 बजे से 03.37 बजे तक (शुभ)
: शाम 06.47 बजे से रात्रि 08.12 बजे तक (शुभ)
: रात 08.13 बजे से 09.37 बजे तक (अमृत)
संजय वस्त्रकार ब्याख्याता व पतंजलि खंड प्रमुख ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी कोरोना कोविड 19 के चपेट में पूरा विश्व है,इस महामारी में बहुतों ने अपने परिजन खोए है,ऐसे परिवार से मिलकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाये और खुशियां बांटे,साथ ही पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हम पौधों को भी रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा करे,तभी रक्षाबंधन का पर्व सार्थक होगा।साथ ही कोरोना के दिशा निर्देशों का पालन करें घर में रहे सुरक्षित रहे।पर्यावरण के अनुकूल राखियों का उपयोग करे।जब भी घर से बाहर निकले मास्क लगाकर निकले,भीड़भाड़ जगह में जाने से बचे,सामाजिक दूरी अपनाए।
पूजन के लिए एक थाली में रोली, चन्दन, अक्षत, दही, राखी, मिठाई और घी का एक दीपक रखें।पूजा की थाली को सबसे पहले भगवान को समर्पित करें। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करवाकर बैठाएं।पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं। फिर रक्षासूत्र बांधकर आरती करें। इसके बाद मिठाई खिलाकर भाई की लंबी आयू की मंगल कामना करें. रक्षासूत्र बांधने के समय भाई तथा बहन का सर खुला नहीं होना चाहिए। रक्षासूत्र बंधवाने के बाद माता पिता का आशीर्वाद लें और बहन के पैर छूकर उसे उपहार भेंट करें।

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