दुर्गुकोंदल: भाई-बहन के प्रेम व पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षाबंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया

By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल।प्रत्येक भारतीय पर्व त्योहार और पूजा-पाठ की सभी परंपराएं किसी न किसी रूप में प्रकृति और पर्यावरण से ही जुड़ी हुई हैं। रक्षाबंधन का पर्व भी उनमें से एक है। यह समय वर्षा ऋतु का है। जब प्राकृतिक वातावरण एकदम धुला, साफ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त होता है। ऑक्सीजन की मात्रा वायुमंडल में बढ़ जाती है। नए पेड़-पौधे उगने लगते हैं और जीव-जंतुओं के लिए भी अनुकूल वातावरण बन जाता है। इसका सर्वाधिक लाभ हमें ही मिलता है। ऐसे में भाई-बहन के प्रेम व पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन रविवार को क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसमें भाई अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा का संकल्प देने का वचन दिए। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक ही नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कारों को प्रदर्शित करने का अवसर भी है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हालांकि इस बार कोरोना काल में पर्व मनाने की शैली बिलकुल बदल गयी है। अधिकतर बहनें इस बार भाई के घर जाने की बजाय उसे ऑनलाइन ही रक्षाबंधन की बधाई देंगी। हालांकि कुछ बहनों ने भाई के पसंद की राखी घरों में ही बनाई जो पर्यावरण के अनुकूल है जैसे बीजो को पिरोकर,गोबर में बीज को सजाकर,छिंदपत्ते आदि से निर्माण किये है जिसमें बहनों का अपनापन व प्यार झलकता है।राखियों पर हर बहन अपने भाई के कलाई पर अच्छी से अच्छी रखी बांधना चाहती है। वहीं दूसरी तरफ भाई भी पीछे नहीं रहे, वे भी अपनी बहनों के लिए गिफ्ट ,गहने नकद राशि दिए ।बहनों एवं बच्चों में भी इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

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