बाँसुरीवादक पं.रोनू मजूमदार की बाँसुरिया धुन सुन श्रोता हुवे मंत्र मुग्ध

छत्तीसगढ़ मनोरंजन

रायपुर।प्रसिद्ध वाग्गेयकार पंडित गुणवन्त माधवलाल व्यास की 80 वीं जन्मजयंती पर ,गुनरस पिया फाउंडेशन एवं पंडित गुणवन्त व्यास स्मृति सँस्थान द्वारा आयोजित ,विश्व प्रसिद्ध बाँसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार का बाँसुरी वादन शहीद स्मारक में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में गुनरस पिया फाउंडेशन के सदस्यों द्वारा छतीसगढ़ी सरस्वती वंदना गया जिसे पंडित व्यास ने स्वरबद्ध किया था। तत्पश्चात पंडित रोनु मजूमदार का परिचय वाचन और उनका सम्मान विभिन्न सहयोगियों द्वारा किया गया।
फिर रोनु मजूमदार का बांसुरीवादन आरम्भ हुआ।शाम साढ़े छह से देर रात तक श्रोतागण बाँसुरी की सुरीली धुन पर झूमते रहे और पंडित मजूमदर द्वारा बजाए गए राग बागेश्वरी का आनन्द लेते रहे। पण्डित रोनु मजूमदार ने पण्डित गुणवन्त व्यास की रची धुनें भी बजाई।मैहर घराने के पंडित रोनु मजूमदार अपनी शानदार लयकारी और विलक्षण शैली के कारण श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। बाँसुरी के ऐसे ही सम्मोहन से ,इस सभा के श्रोता बंधे रहे।
तबले पर शानदार संगत की मुम्बई के प्रसिद्ध तबलावादक ने किया। अजीत पाठक ने देश के हर बड़े कलाकार की प्रस्तुति को अपने सुगठित तबलावादन से न केवल संगत दी बल्कि हर प्रस्तुति को निखारा है। समूचे छतीसगढ़वासी इस जुगलबन्दी के क़ायल हो गए।
पंडित मजूमदार के साथ उनके दोनो सुपुत्र सिद्धार्थ व हृषिकेश मजूमदार भी सहयोगी वादक थे।दोनो ने ही बचपन से बाँसुरी की शिक्षा अपने पिता से ली है, और अब भी रोज़ाना उनके साथ रियाज़ करते है ।

सँस्थान के निदेशक दीपक व्यास ने कहा,पंडित व्यास की इच्छानुसार शास्त्रीय संगीत को घर घर प्रचारित करने का बीड़ा सँस्था ने ज़िम्मेदारी के साथ उठा रखा है जिसके तहत अब तक अनेक स्थापित, प्रसिद्ध कलाकारों के साथ साथ अनेक छोटे बड़े, नवोदित ,कलाकारों को भी गुनरस पिया ने अपने मंच पर छत्तीसगढ़ के संगीत प्रेमियों को सुनाया है।आगे भी सुनाते रहेंगे, क्योकि छतीसगढ़ के श्रोताओं को ऐसी स्तरीय सभाओं में बेहद आनन्द आता है।
कार्यक्रम का सुंदर सफल संचालन छतीसगढ़ के प्रसिद्ध मंच संचालक दीपक हटवार और प्रीति राजवैध ने किया।

कार्यक्रम के अंत मे सँस्थान के आलोक त्रिवेदी ने ,मंचस्थ कलाकारों, श्रोताओं, समस्त सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा, जब तक ऐसे सहयोगी हों, ऐसे श्रोता हों, ऐसे ज़मीन से जुड़े कलाकार हों ,गुनरस पिया का मंच सुरों से महकता ही रहेगा।

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