दुर्गूकोंदल:  पुलिस थाना में अवैध लकड़ी रखी गई ,वन विभाग से  मिली भगत के चलते लकड़ी जप्त नही

By।शिवचरण सिन्हा

कार्यवाही नहीं होने पर आक्रोशित आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने पुलिस थाना घेराव के लिए तहसीलदार को आवेदन दिया

दुर्गूकोंदल। पुलिस थाना दुर्गूकोंदल में अवैध फर्नीचर रखने का आरोप सच साबित हो गई है। लंबे समय अखबार में खबरें आ रही थी, कि पुलिस थाना दुर्गूकोंदल में बड़ी मात्रा में सागौन की अवैध फर्नीचर रखी गई है। और कारपेंटरों के माध्यम अपने मन पसन्द फर्नीचर निर्माण किया जा रहा है। पुलिस थाना दुर्गूकोंदल में फर्नीचर की खबरें आने के बाद वन विभाग के रेंजर और वनकर्मी पुलिस थाना पहुंचकर जांच किया पर पुलिस से मिली भगत के चलते एक भी लकड़ी जप्त नहीं किया। रेंजर, डीएफओ, सीसीएफ से फोन के माध्यम से से शिकायत कर सूक्ष्म जांच करने की मांग की गई। लेकिन रेंजर के द्वारा डीएफओ का सहयोग नहीं मिलने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे थे। और डीएफओ ठोस सबूत बताने पर कार्रवाई की बात कहते। पर वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से कार्यवाही नहीं होने पर आक्रोशित आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने पुलिस थाना की घेराव के लिए तहसीलदार को आवेदन दिया। पुलिस थाना की घेराव की खबर मिलते ही एसडीओपी प्रशांत पैकरा आदिवासी समाज के आर्थिक नाकेबंदी स्थल पहुंचे। और सर्व आदिवासी के अध्यक्ष जगतराम दुग्गा, कुबेर दर्रो, राजेश गोटा, शकुंतला नरेटी, रमेश दुग्गा सहित अन्य लोगों को मनाने की कोशिश किया।

एसडीओपी ने चार दिवस के भीतर टीआई पीलादाऊ चंद्रा को हटाने की बात कही, लेकिन सर्व आदिवासी समाज के लोग नहीं माने और थाना घेराव के लिए नारेबाजी करते निकल पड़े। पुलिस रास्ते में रोकने की कोशिश की पर पुलिस प्रशासन चोर है, आदिवासी एकता जिंदाबाद के नारे लगाकर पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस थाने के सामने एसडीओपी प्रशांत पैकरा ने मनाने की कोशिश किया। पर सर्व आदिवासी समाज टीआई को सामने लाने और अवैध फर्नीचर की जांच के लिए अड़ गए। पुलिस जब अनदेखी किया तो आदिवासी समाज के लोग सड़क पर बैठ गए। थाना घेराव की माहौल गरम होने पर पुलिस विभाग के एडीशनल गोरखनाथ बघेल पुलिस थाना पहुंचे। और सर्व आदिवासी समाज के साथ बातचीत किया फिर अवैध सागौन फर्नीचर होने की जांच के लिए एडीशनल गोरखनाथ बघेल, एसडीओपी प्रशांत पैकरा के साथ सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष जगतराम दुग्गा, उपाध्यक्ष शकुंतला नरेटी, युवा प्रभाग जिला उपाध्यक्ष राजेश गोटा, पुनिता नरेटी, जनपद अध्यक्ष संतोबाई दुग्गा ने थाने में प्रवेश किया, और मालखाना, शस्त्रागार, मोर्चा, कम्प्युटर कक्ष, निर्माण सामग्री व सभी स्थानों का छानबीन किया। जिसमें कबाड़ी में दीवान पलंग, भवन के क्षत में फारा, पुलिस मोर्चा में सागौन की लट्ठा मिला। सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष जगतराम दुग्गा, उपाध्यक्ष शकुंतला नरेटी, राजेश गोटा, संतो दुग्गा ने कहा कि बड़ी मात्रा में पुलिस थाना में अवैध सागौन का फर्नीचर मिला।

सीमेंट बोरी के नीचे में बड़ी मात्रा में सागौन का फर्नीचर होने की अंदेशा था लेकिन पुलिस के दबाव के चलते सीमेंट बोरी नहीं हटाई गई। कबाड़ी , मालखाना स्थल में पुराने सामान के नीचे लकड़ी को दबाकर रखा गया है। हम 10बजे से लकड़ी होने की बात कह रहे थे, लेकिन एसडीओपी प्रशांत पैकरा ने दिनभर गुमराह कर रखे रहे। पर हमारी आरोप सच साबित हुई। वन विभाग अपनी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी और विभागीय कार्य होने के बाद भी पुलिस से मिली भगत कर लीपापोती कार्यवाही की गई। पर समाज ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और मजबूती के साथ थाना घेराव के लिए पहुंच कर सफल कार्यवाही हुई। पुलिस लोगों की सुरक्षा के लिए है, पर खुल लकड़ी का करोबार करने लग गई है। दुर्गूकोंदल में जुआ, सट्टा पुलिस के संरक्षण में चल रहा है। पर पुलिस संरक्षण देकर ऐसे धंधा का फलने फूलने दे रही है। आज वन विभाग की असली चेहरा उजागर हुई। वन विभाग जंगल बचाने के बजाय लकड़ी तस्करों का सहयोग कर रही है। इस अवसर पर रमेश दुग्गा, मुकेश गावड़े, कमलेश मंडावी, प्रेम पुड़ो, कुबेर दर्रो, चंदन दुग्गा, अनिल नेताम , टिकेश्वर नरेटी, पुनऊ गावड़े, पीयुष उसेण्डी, मानसू आचला, देवेन्द्र टेकाम, उमेश पोटाई , दिनेश माहवे, लालसाय उसेंडी, पंडित नरेटी, सेवा चिराम, भुनेश नरेटी सहित बड़ी संख्या में सर्व आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।

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