By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल।हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया अर्थात गुरुवार 9 सितंबर को है। हरतालिका तीज को तीजा के नाम से भी जाना जाता है।इसे सुहाग का पर्व भी कहते हैं।छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार जिसमे महिलाएं पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए निर्जला और निराहार रहकर इस पर्व को करती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।24 घंटे सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं. कहा जाता है कि हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।इस तप को देखकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से मनचाहे पति की इच्छा और लंबी आयु के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।हरतालिका तीज व्रत के लिए मायके से महिलाओं के लिए श्रृंगार का समान, मिठाई, फल और कपड़े भेजे जाते हैं।


शुभ मुहूर्त


प्रातःकाल हरितालिका व्रत पूजा मुहूर्त- 6.03 बजे से सुबह 8.33 बजे तक
प्रदोषकाल हरितालिका व्रत पूजा मुहूर्त- शाम 6.33 बजे से रात 8.51 बजे तक
तृतीया तिथि प्रारंभ- 9 सितंबर 2021, रात 2.33 बजे
तृतीया तिथि समाप्त- 10 सितंबर 2021 रात 12.18 बजे तक

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