दुर्गुकोंदल: स्कूल में स्वामी आत्मानंद जयंती मनाया

By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल।शिक्षा हर समाज और देश के प्रगति का प्रतिबिंब है। छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस महापुरुष के नाम पर उत्कृष्ट विद्यालय का नाम रखा है आज उन्ही की जयंती शासकीय स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय दुर्गुकोंदल संजय वस्त्रकार के पहल पर मनाई गई। स्वामी आत्मानंद जयंती के अवसर पर शाला प्रवेश द्वार व कक्ष को रंग बिरंगे गुब्बारे व पेपर, रंगोली ,पोस्टर, से साज सजावट की गई ।उज्जवी वस्त्रकार, कृति बघेल,मीनाक्षी दुबे,सौरभ भैसारे आदि विद्यार्थियों के द्वारा स्वामी आत्मानंद जी का चित्र के साथ अमृत वचन को खूबसूरती से अपने चित्रकारी में प्रदर्शित किया जिसको विद्यालय के दीवार पर सजाया गया।

स्वामी आत्मानंद जयंती के पावन अवसर पर खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज किशोरे के सहयोग से डिगेश देवांगन पैथोलॉजी लैब प्रभारी ने विद्यालय में आकर विद्यार्थियों का रक्त समूह जांच किया। ततपश्चात विधिवत रूप से स्वामी आत्मानंद के छाया चित्र पर दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत बालक बालक समिति के अध्यक्ष पिकेश्वर पोटाई, उपाध्यक्ष नीलम साहू प्राचार्य एस डी दास समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं व विद्यार्थियों की उपस्थिति में की गई।

स्वामी आत्मानंद जी के विचारों को उज्जवी वस्त्रकार, जागृति ठाकुर, आयुष गायकवाड, अशवन उसेंडी, खुशबू कोमरा, रिबिका रामटेके, आयुषी पोटाई, दिशा अनू कुमार,अमिला जाड़े, सानिया खान, प्रकाश उसेंडी,जनिता कुलदीप सुशीला जाड़े ने अपने भाषणों में स्वामी आत्मानंद जी का जन्म रायपुर जिले के बरबंदा गांव में 6 अक्टूबर 1929 को हुआ था। स्वामी आत्मानंद जी के बचपन का तुलेंद्र था, पिता धनीराम वर्मा बरबंदा गांव के पास के स्कूल में शिक्षक थे। उनकी माता भाग्यवती देवी गृहणी थी।सन1957 में रामकृष्ण मिशन के महाध्यक्ष स्वामी शंकरानंद ने तुलेन्द्र की प्रतिभा, विलक्षणता, सेवा और समर्पण से प्रभावित होकर ब्रम्हचर्य में दीक्षित किया और उन्हें नया नाम दिया, स्वामी तेज चैतन्य। स्वामी तेज चैतन्य ने अपने नाम के ही अनुरूप अपनी प्रतिभा और ज्ञान के तेज से मिशन को आलोकित किया। अपने आप में निरंतर विकास और साधना सिद्धि के लिए वे हिमालय स्थित स्वर्गाश्रम में एक वर्ष तक कठिन साधना कर वापस रायपुर आए। स्वामी भास्करेश्वरानंद के सानिध्य में उन्होंने संस्कार की शिक्षा ग्रहण की, यहीं पर उन्हें स्वामी आत्मानंद का नाम मिला।स्वामी आत्मानंद ने छत्तीसगढ़ में मानव सेवा एवं शिक्षा संस्कार का अलख जगायी।शहरी और आदिवासी क्षेत्र में बच्चों में तेजस्विता का संस्कार, युवकों में सेवाभाव तथा बुजुर्गों में आत्मिक संतोष का संचार किया।27 अगस्त 1989 को भोपाल से लौटते समय राजनांदगांव के पास सड़क दुर्घटना में वे चल बसे इन सभी बातों को खूबसूरती से व्यक्त किये। प्राचार्य एस डी दास ने अपने उद्बोधन में स्वामी आत्मानंद के विचार कि हमें अपने अंदर ही अपने उत्कृष्टता को तलाशने व स्वयं से बदलाव लाकर आगे बढ़ने जैसे प्रेरणा भरे विचारों से सभी को प्रेरित किया।

संजय वस्त्रकार ने अपने उद्बोधन में स्वामी आत्मानंद की जयंती के अवसर पर शाला परिसर को स्वच्छ रखने के लिए सभी से आह्वान किया पिकेश्वर पोटाई, नीलम साहू ,शंकर नागवंशी ने भी बच्चों को संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में पर प्रमिता साह ने भजन प्रस्तुत किया व आभार व्यक्त किया गया ।इस अवसर पर प्राचार्य एस डी दास,संजय वस्त्रकार,दिलीप सेवता, ऐमन धनेरिया,मनीष गौतम,गजेन्द्र टांडिया,सुखसागर कोवाची,सग्राम कल्लो,प्रमिता शाहा,सुधा वर्मा,सीमा विश्वास, मोना राय,सोनाली मलिक,सुचेता उईके, रिया देवनाथ,संकुल समन्वयक शंकर नागवंशी ,मनोजित रॉय, सविता कावड़े,लच्छन दुग्गा,भुनेश्वर नेताम सभी विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन छाया कोरेटी व सुशीला जाड़े ने किया।

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