By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल। बस्तर संभाग अंतर्गत पुरातात्विक अभिलेख सभ्यता सांस्कृतिक परिवेश जनश्रुतिया मान्यताएं विद्यमान है जिसकी व्यापक महत्व को देखते हुए उनका संरक्षण अभिलेखीकरण के माध्यम से किए जाने संबंधी शोध कार्य ग्राम पचांगी तहसील दुर्गुकोंदल विकासखंड दुर्गुकोंदल जिला कांकेर के अंतिम सीमा एवं सुदूर अंचल से प्रारंभ किया गया। यह सुदूर अंचल ग्राम में एक अद्भुत तरीके का स्थान देखने मिला जो एक ऊंची पहाड़ी जिसकी ऊंचाई भूतल से लगभग 150 फीट की ऊपर,पुरातत्व काल का आदमी के पैर का निशान मिला जो पत्थर के ऊपर है। उस पैर के निशान से जल कुंभ है जिसे शोधकर्ता लंबे बांस से मापने पर उसकी लंबाई सैकड़ों फिट होना प्रतीत हुआ ।पैर का निशान को ग्राम के गायता विष्णु राम पूडो व ग्राम वासियों से पूछ परख किया गया। उन्होंने धरती का निर्माण समय किसी पडयोर का होना बताया गया एवं गांव का प्रत्येक हनुम पर उस स्थान का पूजा करने की परंपरा बताया। इस शोध कार्य का प्रमुख गोंडी धर्म आचार्य शेर सिंह आंचला एवं सुकलाल नाग समाज प्रमुख एवं प्रवक्ता तथा शोध कार्य में सहभागी श्यामलाल नरेटी दयाराम आचला राजेश,राजेश कोमरा, रेनू राम, केजा राम, मेनू राम, राम राम ध्रुवा द्वारा सहयोग किया गया।

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