By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल।भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। इस त्योहार को भाई टीका, यम द्वितीया आदि नामों से भी जाना जाता है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन भाई दूज का पावन पर्व मनाया जाता है। ये पर्व भाई-बहनों को समर्पित है।दुर्गुकोंदल क्षेत्र में बहनों ने अपने भाईयों के लिए पूजा की एक थाल जिसमें रोली, फल, फूल, सुपारी, चंदन और मिठाई रखी। चावल के मिश्रण से चौक तैयार कर इस चौक पर भाई को बैठाया फिर बहनें भाई को तिलक लगाई इसके बाद भाई को गोला, पान, बताशे, फूल, काले चने और सुपारी देने के बाद बहने भाई की आरती उतारी।भाई अपनी बहनों को गिफ्ट भेंट किये।
इस दिन प्रातःकाल चंद्र-दर्शन की परंपरा है और जिसके लिए भी संभव होता है वो यमुना नदी के जल में स्नान करते हैं। कायस्थ समाज में इसी दिन अपने आराध्य देव चित्रगुप्त की पूजा की जाती है और चित्रगुप्त जयंती मनाई जाती है।इसेयम द्वितीया भी कहते हैं।भारतीय समाज में परिवार सबसे अहम पहलू है।भारतीय परिवारों के एकता यहां के नैतिक मूल्यों पर टिकी होती है। इन नैतिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए वैसे तो हमारे संस्कार ही काफी हैं लेकिन फिर भी इसे अतिरिक्त मजबूती देते हैं हमारे त्यौहार। इन्हीं त्यौहारों में भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते को दर्शाता एक त्यौहार है।

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