दुर्गूकोंदल:पुरातात्विक घोड़ादर गुफा में मिले पाषाणयुगीन मटका के नमूने

By। शिवचरण सिन्हा

दुर्गूकोंदल। पुरातात्विक,आदिम जनजातीय, संस्कृति, साहित्य,पर्यटन आदि के संरक्षण एवं अभिलेखीकरण हेतु शासन के निर्देशानुसार ब्लाक दुर्गूकोंदल के विभिन्न आदिवासी बहुल गाँवों में लगातार शोध कार्य चल रहा है। आदिम जनजाति शोधकर्ता एवं शिक्षक मुकेश बघेल ने बताया कि ग्राम बांगाचार के घोड़ादर पहाड़ी स्थित प्राकृतिक गुफा में पाषाणयुगीन मटका के नमूने मिले हैं। जो नमूना मिला है वह मटके के ऊपरी हिस्से मूँहाने का अवशेष है उस पर हाथों से विशेष कलाकृति की गई है। 1742-43 में इंदुलगढ़ के लगभग 270 से अधिक हल्बा आदिवासी बघेल परिवार के लोगों को इसी गुफा में महाराष्ट्र के मराठा फौद ने जिंदा जला दिया था। इंदुलगढ़ में प्रथम मराठा आक्रमण के बाद इसी प्राकृतिक गुफा के भीतर हल्बा आदिवासियों ने एक सुरंग बनाने की कोशिश की थी। सुरंग के मूँहाने पर पाषाणी अवशेष प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा पाषाणयुगीन बाहना सहित अन्य तथ्य मिले हैं। इससे संबंधित शोध व इतिहास लेखन जारी है। ग्राम-बांगाचार के हल्बा आदिवासियों ने बताया कि जो प्राचीन अवशेष मटके के रूप में प्राप्त हुए हैं उसे हमारे पूर्वजों ने पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित किया है। आदिकाल से हमारे लोग प्राकृतिक आपदा व जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु कंदराओं का सहारा लिया करते थे। शोधकर्ता मुकेश बघेल ने कहा कि ग्रामीणों की उपस्थिति में इस पुरातात्विक स्थल को संरक्षित किया जा रहा है। फिलहाल यहाँ पर लगातार शोध कार्य चल रहा है जो भी नमूने मिल रहे हैं उसे ग्रामीणों के समक्ष पंचनामा बनाकर जल्द ही परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। शोधकर्ता दल में शिक्षक भारतराम भंडारी,समाज प्रमुख सुकदेव बघेल,शिवप्रसाद बघेल, सुकलाल बघेल,धिराजीराम बघेल, सुबेसिंह बघेल, संतराम दुग्गा, रामकिशन कोमरे, रैनूराम शोरी,मंगूराम कोमरा,लखूराम बघेल,धरमसिंह बघेल, सरपंच गुलाब बघेल प्रमुख रूप से शामिल थे।

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