समाज में बदलाव लाने के लिये,वैविवाहिक कार्ड पर रक्तदान का संदेश

छत्तीसगढ़

महासमुंद / सरायपाली। वैसे तो शादी का कार्ड हर किसी के लिए विशेष होता है और हर कोई यही चाहता है कि उसके कार्ड में कुछ हटके जरूर हो। लेकिन अगर हम कहें कि किसी इंसान ने अपनी शादी के कार्ड में लोगों से रक्त दान एवं वृक्षारोपण करने की याचना की है तो क्या आपको यकीन होगा? दरअसल सराईपाली ब्लॉक के ग्राम बलौदा निवासी उमेश प्रधान ने अपनी शादी के कार्ड में लोगों को विवाह में पधारने के साथ साथ रक्तदान एवं वृक्षारोपण के लिये भी आह्वान किया है। पेशे से पंचायत सचिव उमेश अपनी शादी पर अनूठी पहल करने जा रहे हैं। उन्होंने शादी कार्ड पर प्रेरक नारा ‘वृक्ष बचाएं – पर्यावरण के लिये’ एवं ‘रक्तदान करें – जीवन के लिये’ छपवाया है। साथ ही क्षेत्र में वर्षों से संचालित रक्तदान सेवा समिति, छत्तीसगढ़ से जुड़कर अधिक से अधिक रक्तदान कर जीवन दान देने का निवेदन भी कार्ड पर छपवाया है। इस बारे में बात करते हुए उमेश ने बताया कि मैं पिछले कई वर्षों से रक्तदान सेवा समिति, सरायपाली, छत्तीसगढ़ का सदस्य हूं जिससे जुड़कर कई बार स्वयं रक्तदान कर चुका हूं, आज अंचल में खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान और वृक्षारोपण को लेकर जागरूकता की कमी है, जिसे देखते हुए मैंने यह कदम उठाया, लगभग 1500 लोगों को वैवाहिक कार्यक्रम में आमंत्रित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, सगे संबंधियों को आमंत्रण के साथ मेरा निवेदन भी प्राप्त होगा और इसे देखकर सभी इस प्रकार से जागरूकता की दिशा में कदम उठायेंगे यही सोचकर मैंने अपनी वैवाहिक पत्रिका में प्रेरक नारे छपवाये हैं। रक्तदान सेवा समिति के संस्थापक एवं अध्यक्ष मुस्तफीज आलम ने जानकारी देते हुए बताया कि 2013 में प्रारंभ किए हुअे हमारे अभियान को जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा है 7 वर्षों में रक्तदान सेवा समिति के माध्यम से 39000 लोगों को हमारे रक्तदाताओं के माध्यम से नि:शुक्ल रक्तदान किया गया है। फेसबुक, व्हाट्सएप्प एवं अन्य सोशल साईटों के माध्यम से निवेदन कर लगभग 82000 लोगों को रक्तदाता सदस्य बनाया गया है। समिति सराईपाली, बसना, पिथौरा, रायपुर, सारंगढ़, रायगढ़, बिलासपुर, अंबिकापुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों में एक फोन पर रक्तदाता उपलब्ध करवाने का कार्य करती है। समिति के वरिष्ठ सदस्य पुरूषोत्तम प्रधान ने बताया कि हमारी समिति के कार्य करने का तरीका सबसे अलग एवं पारदर्शी है। हमने फेसबुक, व्हाट्सएप्प सरीखे सोशल मिडिया जैसे प्लेटफार्म में जहाँ लोग अपना टाईम पास करते हैं ग्रूप बनाया और लोगों से नाम, शहर और ब्लड ग्रुप पूछ कर कम्प्यूटर में संधारित करते रहे। जिन्हें ब्लड की आवश्यकता होती है हमारे सदस्य मरीज के परिजन के नाम, पता, समस्या, अस्पताल एवं समय पूछकर तथा ब्लड की जानकारी लेकर एक डीटेल बनाते हैं, साथ ही उसमें परिजनों की सक्षमता जांचते हैं यदि परिजन सक्षम होते हैं तो उन्हें जागरूक कर रक्तदान करवाते हैं वहीं परिजन सक्षम न होने पर मरीज के रिश्तेदार का नंबर अटेंडर के स्थान पर लिखकर उस डिटेल को सभी ग्रुप में वायरल किया जाता है, डिटेल वायरल होते ही कोई भी इच्छुक रक्तदाता दिये गये नंबरों पर सीधे मरीज के परिजन से कनेक्ट हो जाता है, डीटेल में दिनाँक, समय और स्थान साफ साफ लिखा होने से रक्तदाताओं को किसी प्रकार की कोई असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता है एवं मरीज और रक्तदाता के बीच सीधा संबंध बनता है जिससे किसी प्रकार की कोई शंका नहीं होती। समिति के सदस्य शुभम साहू ने बताया कि रक्तदान सेवा समिति के बनाये गये डीटेल से किसी प्रकार का भ्रम नहीं होता पहले कई सारे मैसेज इंटरनेट पर तैरते रहते थे लेकिन हमारी समिति के पहल से हम डिटेल बनाकर उस मरीज के लिये जब तक रक्तदाता न मिले हम नजर रखते हैं तथा जैसे ही कोई रक्तदान करता है उनका एक फोटो और केस क्लोज स्टोरी सभी तरफ वायरल करते हैं जिससे सभी को जानकारी हो जाती है साथ ही रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन भी होता है। रक्तदान सेवा समिति के पिछले 7 वर्षों में अंचल के युवा प्रवीण प्रधान, सुनील सागर, पंकज मेश्राम, धर्मेंद ताण्डी, रितेश साहू, राजेश चौहान, लोकेश यादव, खिलेश साहू, जीतेश, भोजराज बारीक, देवराज लोहा आदि जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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