छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस पर त्रिवेणी संगम साहित्य समिति का विचार गोष्ठी

छत्तीसगढ़ी भाखा बोली मोर शान हरे जी,छत्तीसगढ़िया मनखे के अभिमान हरे जी…



राजिम।छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा पं.क्र.25298 जिला गरियाबंद के साहित्यकारों द्वारा विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रयागभूमि राजिम में किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेखा सोनकर अध्यक्ष नगर पंचायत राजिम थी,जबकि अध्यक्षता समिति के संरक्षक मोहनलाल माणिकपन,”भावुक”राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक ने किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि रेखा सोनकर ने छत्तीसगढ़ी भाषा बोली के महत्व के बारे में बताया कि यह हमारे माँ की बोली हैं,छत्तीसगढ़ी बोली में जो मिठास है वह अन्यत्र कहीं और देखने को नहीं मिलता।इससे पूर्व समिति के साहित्यकारों ने स्वच्छता के लिए राजिम नगर पंचायत को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने वाली रेखा सोनकर अध्यक्ष नगर पंचायत राजिम को बुके एवम पुष्प गुच्छ भेंटकर सम्मानित करते हुये,उनके उज्ज्वल भविष्य एवं राजिम नगर के विकास की शुभकामनाएं प्रेषित किया।कार्यक्रम में काव्य गोष्ठी के कड़ी में युवा कवि तुषार शर्मा नादान ने कहा”छत्तीसगढ़ी ह पोठ हे भाखा,बत्तीस जिला जेकर साखा”कहकर खूब वाहवाही लूटी।नवा रायपुर से पहुंचे युवा कवि नरेन्द्र कुमार साहू,”पार्थ”ने कहा ,”छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी भाखा ह नदावत हे”कहकर छत्तीसगढ़ी के प्रति अपनी चिंता व्यक्त किया तो संतोष कुमार साहू”प्रकृति”ने अपने अंदाज में कहा”मोर पांव म गड़ गे कांटा, जबले छत्तीसगढ़ी भाखा के होइस बांटा”पढ़कर माहौल को ऊँचाई प्रदान किया।इसी कड़ी में युवा कवि छग्गु यास अडील ने काव्य पाठ करते हुए कहा,”मैहा छत्तीसगढ़ी हरों,मोला छत्तीसगढ़ी रहन दो,”कहकर छत्तीसगढ़ी के पीड़ा को व्यक्त किया, तो साहित्यकार ,रोहित माधुर्य ने अंग्रेजी फैसन अपनाने वाले पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि,वाह रे परबुधिया मनखे दाई ल तै तरसावत हस,पर के तै नकल करके अपन ल लतियावत हस” समिति उपाध्यक्ष किशोर निर्मलकर ने,कोरोना टीकाकरण को बढ़ावा देते हुए कहा कि,ये दे जिनगी के नई हे ठिकाना, टीका चल लगा लेबों संगी”पढ़कर खूब वाहवाही लूटी।मोहनलाल मानिकपन,”भावुक”एवम मकसूदन बरीवाला ने छत्तीसगढ़ी भाषा बोली के संदर्भ में अपने विचार रखते हुए अपने दैनिक जीवन मे छत्तीसगढ़ी भासा बोली को अधिक से अधिक अपनाने एवं इसके प्रचार प्रसार पर जोर दिया।कार्यक्रम संचालन करते हुए कवि श्रवण कुमार साहू”प्रखर”ने छत्तीसगढ़ी भासा पर जबरदस्त रचना पढ़ते हुए कहा कि, छत्तीसगढ़ी भाषा बोली मोर शान हरे जी,छत्तीसगढ़िया मनखे के अभिमान हरे जी पढ़कर कार्यक्रम को बुलंदी पर पहुँचाया।आभार प्रदर्शन नरेन्द्र कुमार पार्थ ने किया।

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