दुर्गुकोंडल :स्वशासी जिला परिषद् का गठन हो- ललित नरेटी

By।शिवचरण सिन्हा

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दुर्गुकोंडल । छ.ग.शासन द्वारा पंचायत उपबंध(अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु प्राविधिक नियम को अपने वेबसाइट में अपलोड कर उसमें संशोधन व सुझाव मांगी गई है। शासन के इस बहुप्रतीक्षित घोषणा को अमलीजामा पहनाने प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव छत्तीसगढ़ के विभिन्न समुदाय से चर्चा कर नियम बनाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने राज्य के आम जनों से भी सुझाव मांग रहे हैं।
पेसा नियम (प्राविधिक) में संशोधन के लिए सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी ने स्वशासी जिला परिषद् के गठन की मांग करते हुए अपने सुझाव शासन की वेबसाइट में भेजा है, भेजे गए सुझाव में प्रमुख बातें निम्नांकित हैं अनुसूचित क्षेत्र में बिना अनुसूचित जनजाति के सदस्य वाली नए पंचायत का गठन ना करें, ग्राम सभा के सचिव गांव का ही व्यक्ति हो ताकि बाहरी व्यक्ति का ग्राम सभा के निर्णय की प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप ना हो, ग्राम सभा के एजेंडा ग्राम सभा में तय किया जावे ऊपर से ग्राम सभा के लिए एजेंडा तय न किया जावे, किसी विशेष शासकीय एजेंडा पर चर्चा करनी हो तो ग्राम सभा अध्यक्ष को इसकी पूर्व सूचना दी जानी चाहिए, ग्राम सभा के न्याय समिति में मांझी, गायता, पढ़हा, पेनो, पेरमा, वड्डे, सिरहा, बैगा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, विवादों के निपटारे के लिए न्याय समिति के साथ-साथ पाली सभा, परगना परिषद् और स्वशासी जिला परिषद् का गठन किया जावे। ग्राम सभा द्वारा ग्राम, जनपद और जिला पंचायत से कैसे संवाद व समन्वय स्थापित किया जाएगा तथा उच्च स्तर की निकाय ग्राम सभा के अधिकार व शक्तियों को अपने हाथों में ना लें इस बात की व्यवस्था की जावे। यदि कोई शासकीय कर्मचारी जानबूझकर ग्रामसभा के निर्णय का अवहेलना करता है तो ग्राम सभा को कार्रवाई किए जाने का प्रावधान हो तथा उच्च अधिकारियों को दी गई सूचना आज्ञापक हो।
ललित नरेटी ने सुझाव देते हुए आगे कहा कि मतदाता सूची में ग्राम सभा के अनुमोदन के पश्चात् ही किसी भी नये व्यक्ति का नाम जोड़ा जावे, ग्राम सभा को अपनी संस्कृति, परंपरा को शासकीय अभिलेख में कैसे दर्ज करवाना है इस बात को भी नियम में जोड़ा जावे, किसी भी प्रयोजन के लिए जमीन अधिग्रहण करने से पहले ग्राम सभा से यह अनापत्ति प्राप्त करना चाहिए कि उक्त स्थल में कोई पेन-पुरखा का वास स्थल तो नहीं है? यदि कोई भूमि किसी प्रयोजन के लिए अधिग्रहित किया गया है और 5 वर्ष तक उसका उपयोग उक्त प्रयोजन के लिए नहीं किया जा रहा है तो वह भूमि मूलतः भू-स्वामी को वापस की जावेगी, किसी भी गौण खनिज के पूर्वेक्षण, लीज व नीलामी से पूर्व ग्राम सभा की लिखित अनुमति आवश्यक हो इस संबंध में कंपनी या व्यक्ति विधि सम्मत दस्तावेज प्रस्तुत करेगा, विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्र या गांव में किसी भी नए व्यक्ति को बसाने के पूर्व ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होना चाहिए।

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