दुर्गुकोंदल : शिक्षकों ने छात्रों को बताया मानव अधिकार दिवस का महत्व

By।शिवचरण सिन्हा

दुर्गुकोंदल। शासकीय स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय दुर्गुकोंदल में मानव अधिकार दिवस 10 दिसंबर शुक्रवार को विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्राचार्य एस डी दास व्याख्याता संजय वस्त्रकार,दिलीप सेवता, शिव कुमार मडावी के मार्गदर्शन में मानव अधिकार का लोगो बनाकर विद्यार्थियों को इसका महत्व बताया। शिक्षा के क्षेत्र में मानव अधिकारों की शिक्षा, शिक्षा के अधिकार का एक अनिवार्य अंग है तथा हाल के मेसे एक मानव अधिकार के रूप में बड़े पैमाने पर मान्यता दी गई है। अपने तथा दूसरों के अधिकारों और आजादी के ज्ञान को मानवीय प्रतिष्ठा तथा सभी के अधिकारों के सम्मान की गारंटी का मुलभुत साधन माना जाता है। मानव अधिकारों की शिक्षा का मूल भाव यह है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रशिक्षित और व्यावसायिक कामगारों को ही तैयार करना नहीं है बल्कि समाज में परस्पर व्यवहार करने का कौशल रखने वाले व्यक्तियों का विस्कास करने में सहयोग देना भी है। मानव अधिकार शिक्षा का उदेश्य यह है कि विद्यार्थी एवं छात्र समाज में परिवर्तन लाने तथा समाज को साथ लेकर चलने की योग्यता विकसित करें। यह शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बना सके और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए पूरी क्षमता के साथ जुड़ सकें। शिक्षा ही लोगों को सशक्त करती है, उनके जीवन स्तर में सुधार लाती है तथा सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक नीतियों की निर्णयात्मक प्रकिया में भागीदारी के लिए उनकी क्षमता में बढ़ोतरी करती है। हमें ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जिसमें शिक्षा मानव व्यक्तित्व के पूर्ण विकास तथा मानव अधिकारों और मुलभूत स्वंतत्रता के लिए आदर को सुदृढ़ करने पर केन्द्रित हो।इस अवसर पर प्राचार्य एस डी दास,अजय नेताम,संजय वस्त्रकार,दिलीप सेवता,शिवकुमार मडावी,प्रांशु बंजारे,गिरधारी साहू,चंद्रकांता केसरिया,देवकुमारी साहू, ऐमन धनेरिया,मनीष गौतम,गजेन्द्र टांडिया,अक्षय नायक,सुखसागर कोवाची,खेमलाल साहू,पंकज निषाद,प्रमोद यादव,प्रमिता शाहा,सोनिया चौधरी,सीमा विश्वास,मनोजित राय,सविता कावड़े,मिथिला पुडो,लच्छन दुग्गा,भुनेश्वर नेताम,दुर्गेश खुदसङ्गे,रामकुमार भुआर्य आदि उपस्थित थे।

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