खारून नदी की संरक्षण के लिए गंगा महाआरती- डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर

राज्यपाल अनुसुइया उइके होंगी शामिल

रायपुर।राजधानी रायपुर की जीवनदायिनी लाइफ लाइन कही जाने वाली खारून नदी की संरक्षण के लिए गंगा महाआरती, वृक्षारोपण, तथा पॉलिथीन मुक्त भारत के लिए जन संकल्प कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल अनुसुइया उइके की गरिमामय उपस्थिति में 15 दिसंबर दिन बुधवार अपरान्ह 4 बजे प्रारंभ होगा। उक्त जानकारी पर्यावरण संरक्षण डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने दी।
कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने कहा की खारून महा आरती का उद्देश्य सिर्फ नदी को संरक्षण प्रदान करना है ताकि हमें आने वाले भविष्य के लिए जल की उपयोगिता को समझना होगा और जल का उपयोग कम से कम कर उसे बचाने का प्रयास करने की आवश्यकता है।
पर्यावरण संरक्षक डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने कहा कि नदी की नियमित साफ सफाई एवं नदी के किनारे वृक्षारोपण कर नदी की संरक्षण किया जाना है. नदी को पॉलिथीन से मुक्त रखना है पूजा सामग्री हवन पूजन के बाद पॉलिथीन में भरकर नदी में विसर्जित कर देते हैं इसे हमें रोकना होगा. नदी में कई नाली से उपयोग में लाए दूषित जल के साथ पॉलिथीन एवं गंदगी भी सीधे नदी में पहुंचती है जिससे नदी का जल दूषित होता है एवं जीव जंतु की मृत्यु हो जाती है.
डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने कहां की नदी ही हम सब की जीवनदायिनी है जो हमें खेत खलियान के लिए पानी उपलब्ध कराती है नदी का महत्व तो वेद पुराणों में भी दिया गया है नदी अनादि काल से निरंतर बहती आ रही है इसका उपयोग हमारे ऋषि मुनि व समस्त समुदाय के द्वारा समय-समय पर किए हैं और हम करते आ रहे हैं नदी हमें बहुत कुछ देती है नदी से हमें रेत की प्राप्ति होती है फसल के लिए पानी की प्राप्ति होती है व अन्य उपयोग की वस्तुएं नदी अपने साथ लाती है निश्चित ही आज नदी को संरक्षण की अति आवश्यकता है ।आज नदी का जिस रूप से मानव जीवन के द्वारा दोहन किया जा रहा है जिस वजह से पानी की किल्लत दिनों दिन बढ़ती जा रही है अगर नदी को संरक्षण किया जाता है तो निश्चित बहने वाले क्षेत्र का वाटर लेवल सामान्य रहेगा जिससे हमें पानी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा एवं सभी लोगों को प्रण लेना चाहिए कि पानी का उपयोग कम से कम कर हम पानी बचा सके।

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