क्रान्ति सेना का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न

छत्तीसगढ़

रायपुर। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना अपने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण हेतु अदरा लदका नाम से दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर 1 व 2 जून को ग्राम लखना स्थित सोमनाथ धाम में आयोजित किया इस आवासीय शिविर में प्रदेश भर के पदाधिकारी व सेनानी उपस्थित थे।
प्रथम दिवस छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना के साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष यशवंत वर्मा द्वारा संगठन के संविधान का वाचन किया तदोपरांत विषय विशेषज्ञों का प्रशिक्षण चालू हुआ जिसमे चार्टेड एकाउंटेड विष्णु बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, संस्कृति व राजनीतिक इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए कैडर निर्माण के गुर सिखाये ।
छत्तीसगढ़ी राजभाषा के प्रांतीय संयोजक नन्दकिशोर शुक्ल द्वारा मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के तकनीकी पहलुवों को बताते हुए इसके माध्यम से पढाई लिखाई व कामकाज में जोर देने कहा।
आरटीआई एक्टविस्ट राहुल वर्मा व दिलीप मिरी ने सूचना का अधिकार कैसे लगाया जाता है उसके सभी नियम कानून का प्रशिक्षण दिया।
जाने माने चिकित्सक डॉ. धीरेन्द्र साव ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति को कैसे संरक्षित किया जाय उसके प्रमुख बिन्दुओ को सेनानियों को समझाया।
द्वितीय दिवस प्रातः छत्तीसगढ़ी मार्शल आर्ट (अखाड़ा ) व लाठी चालन का प्रशिक्षण हुआ साथ ही भगवान् सोमनाथ (बूढ़ादेव) की भव्य पूजा अर्चना आरती की गई।
प्रशिक्षण देने वालो में देवेंद्र नेताम ने सोशल मिडिया से जुड़े विषयो पर उपस्थित सेनानियों को प्रशिक्षण दिया व भूषण लाल साहू ने सोशल मिडिया के कानूनी पक्ष को रखते हुए कुशल संचालन पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के अंतिम दौर में क्रान्ति सेना के प्रदेश संयोजक गिरधर साहू ने उपस्थित सभी सेनानी प्रशिक्षार्थियों को सम्बोधित करते हुये अपने दायित्वों का बखूबी निर्वाहन करने के निर्देश दिए वहीँ महिला क्रान्ति सेना की अध्यक्षा लता राठौर ने उपस्थित महिला सेनानियो को संगठन विस्तर करने के गुर सिखाये प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अजय यादव ने तार्किक बात कैसे रखा जाय इस पर प्रकाश डाला।
प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर अदरा-लदका के सार को उपस्थित जनो को बताया उन्होंने समस्त जिलो के पदाधिकारियों को अपने जिलों में हर तिमाही में नियमित प्रशिक्षण करने के निर्देश दिये अपने संबोधन में उन्होंने कहा की संगठन में पैर छूने की परंपरा को बन्द करके सिर्फ “जोहर छत्तीसगढ़” का अभिवादन हमे आपस में करना चाहिये क्योंकि संगठन में कोई बड़ा या छोटा नही होता उन्होंने प्रदेश के समस्त छत्तीसगढ़िया समाज के घर से एक सेनानी क्रान्ति सेना में जोड़ने तथा अगले 2 महीने में छत्तीसगढ़ी भाषा को पढाई लिखाई व कामकाज की भाषा बनवाने का संकल्प भी दिलाया, उपस्थित साहित्यकारों को छत्तीसगढ़िया महापुरषों के गौरवशाली इतिहास खंगाल के एक साहित्य निर्माण करने का आह्वान किया ताकि सभी जन यहां के महापुरषों को नजदीक से जान पाए
इस दौरान बहुत से अतिथि प्रशिक्षकों ने सेनानियों को संबोधित एवं प्रशिक्षित किया व प्रदेश सचिव चन्द्रकान्त यदु द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करके कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा किया गया।

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