शासकीय आयुष विश्वविद्यालय की ग़लत नीतियों के ख़िलाफ़ फ़ार्मासिस्ट करेंगे भूख हड़ताल

एजुकेशन छत्तीसगढ़

रायपुर। छत्तीसगढ़ यूथ फ़ार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं शासकीय पं दिनदयाल उपाध्याय स्मृति आयुष फ़ार्मेसी महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं की मीटिंग हुई जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन की ग़लत नितियो के विरोध में उग्र आंदोलन एवं भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया गया है । ग़ौरतलब है कि विश्वविद्यालय में व्याप्त ख़ामियों के चलते फ़ार्मेसी के विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में है । विश्वविद्यालय द्वारा PCI (फ़ार्मेसी काउन्सिल ऑफ़ इंडिया) एवं AICTE से मान्यता प्राप्त किए बग़ैर राजनांदगाँव एवं रायपुर में 74 बच्चों को प्रवेश दे दिया गया है । और अब तक नए बैच के लिए मान्यता प्राप्त करने प्रशासन द्वारा किसी प्रकार का सार्थक प्रयास नहीं किया गया है जिसके कारण लगातार दूसरे वर्ष ज़ीरो year होने को है । विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लगातार तीन वर्षों से शिक्षण शुल्क 25000रु , लैब शुल्क 2000 रु , लाइब्रेरी शुल्क 1000 रु , सांस्कृतिक एवं खेलकूद शुल्क 500 रु और स्टूडेंट वेलफ़ेयर शुल्क 1000 रु वसूल किया गया है लेकिन जिस मद में पैसा लिया जा रहा है उसकी सुविधा छात्रों को नहीं दी जा रही है । महाविद्यालय में पढ़ाई के लिए समस्त विषय शिक्षकों की भर्ती की माँग पिछले एक साल से विद्यार्थी कर रहे हैं साथ ही लैब , लाईब्रेरी , एवं नियमित कक्षाओं के लिए स्वयं की बिल्डिंग की माँग कर रहे हैं । जनवरी माह में आयुष फ़ार्मेसी महाविद्यालय के विद्यार्थी CGYPA संगठन के नेतृत्व में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं स्वास्थ्य मंत्री T S सिंहदेव जी से गुहार लगा चुके हैं तभी मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने रुकी हुई परीक्षाए आयोजित करवाई थी एवं प्रायोगिक कक्षाएँ एक निजी महाविदयालय में करने की वैकल्पिक व्यवस्था की थी । दो दिन पूर्व कुलसचिव का पत्र प्राप्त हुआ जिसमें इस वर्ष आयोजित काउन्सलिंग को रद्द कर दिया गया है इस सम्बंध में संगठन के अध्यक्ष फ़ार्मासिस्ट राहुल वर्मा द्वारा कुलसचिव डॉक्टर राजेश हिसिकर से मुलाक़ात कर पूछा गया तो उन्होंने अब फ़ार्मेसी की शिक्षा शासकीय आयुष महाविद्यालय में बंद करने के विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय से अवगत कराया और अध्यययनरत विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया । विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निरंकुस रवैय्ये को देखते हुवे संगठन एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उग्र आंदोलन करने एवं माँगो का पालन नहीं होने तक भूख हड़ताल करने का कड़ा निर्णय लिया है ।


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