सुराजी गांव आर्थिक गतिविधियों और रोजगार की सम्पूर्ण योजना है:श्री बघेल

छत्तीसगढ़

रायपुर।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि सुराजी गांव योजना राज्य शासन की सर्वाधिक प्राथमिकता की योजना है। सुराजी गांव एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें पुरातन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुर्नजीवन मिलेगा वहीं आर्थिक और रोजगार संबंधी अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।
श्री बघेल कल मंत्रालय में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण निधि नियम में संशोधन कर इसका दायरा बढ़ाया गया है।
बैठक में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वनमंत्री मोहम्मद अकबर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्र कुमार, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, प्राधिकरण के सदस्यगण सहित मुख्य सचिव सुनील कुजुर, पुलिस महानिदेशक डी.एम. अवस्थी, अपर मुख्य सचिव के.डी.पी. राव एवं आर.पी. मंडल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की दृष्टि से नरवा, गरवा, घुरूवा अउ बाड़ी अभिनव एवं महत्वपूर्ण योजना है। पशुपालन को वतर्मान में अनार्थिक क्रिया होने के कारण बोझ समझा जाने लगा हैं। वास्तव में ये हमारे पशुधन है और एक बार फिर से सुराजी गांव योजना के माध्यम से इन्हें तथा हमारे जल संसाधनों, जैविक खाद और बाड़ी के समन्वित विकास को ग्रामीण अर्थव्यस्था का आधार स्तंभ बनाना है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों के गांवों में गोठान का निर्माण वन विभाग के द्वारा किया जाएगा, इसके लिए कैम्पा की राशि का उपयोग किया जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा नगरीय क्षेत्रों के लिए भी गौठान निर्माण पर भी जोर दिया, इससे सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने प्रदेश में बनाए जा रहे गोठानों का समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित हो सके इसके लिए जनप्रतिनिधि गौठानों का नियमित निरीक्षण एवं मानिटरिंग करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में धान बुआई के बाद मवेशियों को खुला नहीं छोड़ने की छत्तीसगढ़ में परम्परा रही है। उन्होंने रथ यात्रा के बाद ’रोका छेंका’ की छत्तीसगढ़ी परम्परा के अनुरूप निर्णय लेकर तथा जन-सहयोग से इसका प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौठानों में पशुओं के लिए ’डे-केयर’ की व्यवस्था है। रात में मालिक अपने पशुओं को घरों में रखेंगे। उन्होंने कहा कि गांवों में पैरादान के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करें और चारागाह विकास के लिए उपयुक्त भूमि का चिन्हांकन कर लें। उन्होंने गौठान व्यवस्था से ग्राम पटेलों को भी जिम्मेदारी सौपने तथा जहां पटेलों के पद रिक्त हैं वहां नियुक्त करने के निर्देेश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने गौठानों के लिए उपयुक्त ऊंचे स्थानों का चयन करने, इसके समीप हरे चारे की व्यवस्था करने के लिए चारागाह भूमि का चिन्हांकन करने भी कहा। उन्होंने गौठान की व्यवस्था से मवेशी चराने का कार्य करने वाले लोगों और स्व सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को जोड़ने के साथ ही रोजगार परक कार्य प्रारंभ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं और महिलाओं को देशी किस्म के कुक्कुट पालन और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण से जोड़ा जा सकता है।
बैठक में बताया गया कि नई सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण निधि नियम में संशोधन कर इसका दायरा बढ़ाया गया है। पहले जहां निर्माण कार्याें पर जोर था, वहीं संशोधन के बाद अब स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, जल संरक्षण, पशु सेवाएं, रोजगार मूलक योजनाएं, कौशल उन्नयन जैसे अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं में भी कार्य किये जा सकेंगे। इनके माध्यम से हितग्राही मूलक एवं सामुदायिक योजनाओं को स्वीकृत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण प्राधिकरण के तहत नये कार्याे को स्वीकृति प्रदाय करने केे लिए जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया जाएगा। सभी संबंधित जिला कलेक्टर अपने जिलों में जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव प्राप्त कर एवं बैठक लेकर प्राथमिकता आधार पर प्रस्ताव 10 जुलाई तक प्राधिकरण को भेजना सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री के उप सचिव तारन प्रकाश सिन्हा ने प्राधिकरण के कार्यों पर आडियो-वीडियो का प्रदर्शन कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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