फर्जी ऋण से 4 लाख 10 हजार रुपये किसान के नाम से निकाला,किसानों जब बैंक का नोटिस मिला तब पता चला

क्राइम छत्तीसगढ़

धमतरी।मगरलोड विकासखण्ड के ग्राम पंचायत झाझरकेरा के आश्रित ग्राम भालुचुवा निवासी गोविंद राम ध्रुव पिता खोरबाहरा के नाम से ग्राम बोरसी निवासी अजय निषाद पिता साधुराम ने फर्जी तरीके से 4 लाख 10 हजार रुपये आहरण करने का मामला प्रकाश में आया है।प्रार्थी कृषक गोविंद राम ध्रुव को जब पता चली की उनके नाम से फर्जी ऋण सम्बन्धित बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा धमतरी से नोटिस आया है ।तो कृषक अचंभित हो गया कि 4 लाख 10 हजार रुपये की ऋण कब लिया।कृषक के नाम से केसीसी के माध्यम से अजय पिता साधुराम ने 2013 में फर्जी तरीके से लाखो रुपये की निकाली गई है।पीड़ित कृषक ने बताया न बैंक ऑफ महाराष्ट्र से ऋण लिया है नही उक्त बैंक में खाता है उन्होंने ऋण लेने न कोई दस्तावेज में हस्ताक्षर किया गया है।पीड़ित किसानों को संदेह है कि उनका लेन देन प्राथमिक कृषि साख समिति बोरसी में होता है खाद उठाव के लिए ऋण पुस्तिका जमा किया गया था।उसी दरम्यान समिति प्रबंधक और ऑपरेटर ,अजय निषाद और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के कर्मचारियों ने उनका रिकार्ड का इस्तेमाल चोरी छिपे कर
सांठगाठ होकर उनके नाम से फर्जी लाखो रुपये की ऋण आहरण किया गया है ।कृषक को जब बैंक का नोटिस थमाया तो वह दंग रह गया कितनी राशि का लोन केसीसी से कब ली गई है।इस सम्बंध में कृषक ने बोरसी बैंक से सम्पर्क किया गया जहां कर्मचारियों से कोई संतुष्ट प्रद जानकारी नही मिला।तब उन्होंने थाना मगरलोड में शिकायत किया मगर रिपोर्ट नही लिखा गया है और लाखों रुपये की फर्जी कार्यो में पुलिस ने सहयोग कर समझौता करा दी जो पुलिस की कार्यवाही में लापरवाही बरती गई है ।इस तरह के मामलों को इंवेस्टिगेट के बजाय दोनो पक्षों में राजी नामाकराकर मामला खत्म कर दी।एक और समुदायकी पुलिसिंग कर लोगो को छोटे छोटे मामलों को ग्राम स्तर में निपटाने की बात करते है वही लाखो रुपये की फर्जीवाड़ा करने वाले अपराधी को सजा देने के बजाय दोनो पक्ष में राजी कर फर्जीवाड़ा मामलों को थाने में दबा दिया।जो पुलिस की कार्यशैली में प्रश्नचिन्ह लग गया।

गोविंद ध्रुव भालुचुवा-
मेरे नाम से फर्जी तरीके से अजय निषाद द्वारा सन 2013 में 4 लाख 10 हजार रुपये की निकाली गई है।अजय निषाद द्वारा ऋण की राशि जमा कर दी गई है मामला खत्म हो गया है।।

नेमचंद निषाद समिति प्रबंधक बोरसी –
इस सम्बंध में मुझे कुछ जानकारी नही सत्र 2013 मैं कार्यरत नही था।

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