ब्रम्हदेव पटेल पहलवानी में आज भी दिल अजीज

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ टाइगर , फ़ोटो समाचार पत्र

रायपुर। गुजरे जवाने के कुश्ती में मशहूर रहे ब्रम्हदेव पटेल आज भी हर दिल अजीज हैं इनकी तुलना कई पहलवानों के साथ कि जाती हैं । झलमला निवासी ब्रम्हदेव पटेल को बचपन से ही पहलवानी में रुचि था, जब ये कुश्ती के लिए गांव से शहर की ओर रुख किया तो शायद किसी ने भी नही सोचा था की वह इतने बड़े लेवल तक पहुचेंगे लेकिन उनके अथक प्रयास ने उन्हें काबिल बनाया । ब्रम्हदेव पटेल ने कुश्ती में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया हैं इनका नाम खेल सूची में दर्ज हैं हालांकि ये उन सालों की बात हैं जब छत्तीसगढ़ ,मध्यप्रदेश का हिस्सा था , अब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बन गया हैं। श्री पटेल को अभी भी छत्तीसगढ़ टाइगर कहते हैं इन्हें भुलाया नही जा सकता । वह युवावों के आदर्श हैं जब भी कुश्ती जिक्र होता हैं तो पूर्व पहलवान में उनका नाम आता हैं। श्री पटेल ने 1980 रायपुर में शेखन गुरु स्मृति प्रतियोगिता में हिस्सा लिए जिसमें वह कुश्ती के विजेता रहे थे ,उनको छत्तीसगढ़ टाइगर का खिताब मिला था। वह मध्यप्रदेश के प्रख्यात पहलवान आई .पी .सिंह के मार्गदर्शन में भारतीय कुश्ती शिक्षा बी एस पी अखाड़ा भिलाई में शिक्षा ग्रहण किया हैं। वह कटनी व मंडल में राज्य स्थरीय प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं ।1975 में दुर्ग कुमार 1979 में जिला चेम्पियन तथा आप अपने कॉलेज के विजेता भी रहे हैं। जब ये जीत के घर लौटे तो इनके प्रसंशको ने इनका भव्य स्वागत किया था।

छत्तीसगढ़ टाइगर ब्रम्हानंद पटेल

श्री पटेल हालही में सामाजिक क्षेत्र में निस्वार्थ सेवार्थ कार्य कर रहें हैं । वह प्रदेश सरंक्षक सर्व मरार पटेल ,प्रदेश संयोजक कला परम्परा भिलाई व अध्यक्ष- सेल रिफ्रेक्टरीज वर्कर्स युनियन भिलाई, अध्यक्ष -सेवारत सेवानिवृत्त अधिकारी कर्मचारी संघ झलमला जिला बालोद ,समाज सेवी श्रमिक नेता भिलाई .के अलावा संरक्षक मातृभूमि सेवा संगठन पैरी जिला बालोद आदि सामाजिक संस्थाओ के साथ ही यूनियन का नेतृत्व कर रहे हैं।

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