शिक्षक दिवस विशेष:विद्यार्थियों के नाम पाती

एजुकेशन छत्तीसगढ़

By।श्रीमती अंजुम शेख

प्रिय बच्चों ,वर्तमान सदी युवाओं का है ,आगामी जनगणना में हमारे देश की जनसंख्या में सबसे बड़ी संख्या युवाओं और बच्चों की होगी यानी 25 वर्ष से कम ।वर्तमान शिक्षा व्यवस्था चाइल्ड सेंटर्ड है ,यानी बाल केंद्रित आज विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून है उनके अधिकारों की बात होती है तो क्यों ना बच्चों आज आप अपने इस अधिकार का प्रयोग करके अपना भविष्य उज्जवल बना ले और ना सिर्फ अपना बल्कि अपनी शाला ,राज्य और देश का।
आज आपके सामने सारा आसमान है उड़ने के लिए ,एक सुनहरा भविष्य आपका इंतजार कर रहा है बस आवश्यकता है अपनी प्रतिभाओं को पहचान कर उसे निखारने का ,क्योंकि बच्चों

“”मंजिले उन्ही को मिलती है
जिनके सपनों में जान होती है ,
पंखों से कुछ नहीं होता
हौसलों से उड़ान होती है”

 आज हर कोई हमारी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों को ही प्रत्येक स्थिति का जिम्मेदार मानते हैं ,तो मैं कहना चाहूंगी कि अगर, हमारी शिक्षा व्यवस्था में दोष होता तो रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड की कन्या शाला की छात्राओं का चयन राज्य स्तरीय विज्ञान और विभिन्न प्रतियोगिताओं में नहीं होता कवर्धा जिले के 12वीं के छात्र का चयन केवीपीवाई किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना में नहीं होता और ना ही जगदलपुर की एक गरीब छात्रा का चयन आईएएस अधिकारी के रूप में होताl ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने प्रस्तुत है l
सरकार द्वारा विभिन्न स्कूलों में विभिन्न प्रकार की सुविधाएं जैसे पुस्तके ,शाला गणवेश ,एमडीएम,  अवसर पुस्तिका, संपर्क पुस्तिका ,शिक्षा गुणवत्ता ,प्रवेश उत्सव ,शाला सिद्धि, जवाहर नवोदय परीक्षा ,ग्रामीण राष्ट्रीय प्रतिभा खोज, संपर्क फाउंडेशन ,अरविंदो सोसाइटी ,शिक्षा गुणवत्ता ,जल संरक्षण अभियान ,कई प्रकार के मूल्यांकन प्रवेश उत्सव भिन्न प्रकार के प्रशिक्षण एससीईआरटी और एनसीईआरटी द्वारा प्रायोजित तथा औरोबिंदो सोसायटी एवम अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा आयोजित विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण ,स्वर्गीय राजीव गांधी जयंती पर सूचना एवं प्रौद्योगिकी पखवाड़ा, शाला सिद्धि ,फिट इंडिया, लइका मड़ाई  ,इंस्पायर और इग्नाइट अवार्ड सभी बच्चों के लिए उनकी प्रतिभा को सामने  लाने के लिए उनका उत्साहवर्धन करने के लिए और साथ ही साथ"" निखार प्रोजेक्ट"" ना सिर्फ प्रतिभावान बच्चों के लिए बल्कि अपने स्तर से पिछड़े बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए जिससे कि  उन्हें ,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेl
   जिस तरह शरीर की खुराक खाना होती है, उसी तरह दिमाग की खुराक पढ़ाई होती है हमेशा कुछ ना कुछ पढ़ते रहना चाहिए, सिलेबस के बाहर कोर्स से हटकर भी l
 मैं अंजुम शेख शिक्षिका बाद में हूं सर्वप्रथम तो मैं अपने आप को एक विद्यार्थी मानती हूं ,क्योंकि मुझे लगता है जीवन के हर क्षण हर पल हर समय हर किसी मनुष्य से कुछ ना कुछ सीखने का हमें हर पल अवसर प्राप्त होता रहता है lऔर मेरा एक सिद्धांत है "'

READ MUCH,
WRITE MORE AND THINKMOST””

अर्थात थोड़ा पढे उससे थोड़ा ज्यादा लिखें और सबसे ज्यादा सोचें ।”चिंतन” करें l

“”Because a good thinker is a good Creater””

साथ ही Self Studyऔर Self Assessment अर्थात स्व अध्ययन और स्व मूल्यांकन को भी अपनी स्टडी अपनी पढ़ाई का अभिन्न अंग बनाना चाहिए ,क्योंकि जब तक हम स्वयं किसी तत्व का अध्ययन ना कर लें और उसके पश्चात आत्म अवलोकन ना करें तो हमें वह चीज समझ नहीं आती।
और अंत में उन बच्चों से कहना चाहूंगी जो थोड़ी सी असफलता से अनुचित कदम उठा लेते हैं तो यह सरासर गलत है ,अनुचित है ,जो परिश्रम करते हैं वह जानते हैं कि असफलता सफलता की प्रथम सीढ़ी है ,आवश्यक है अपने प्रयास जारी रखना अपनी सहभागिता देना आज की जनरेशन सफलता पर जल्दी उत्साहित होने वाली है और उसी तरह थोड़ी सी असफलता में बहुत जल्दी विचलित होने वाली कारण है -धैर्य की कमी जरूरी यह नहीं कि आप एक बार में सफल हो जाए ,जरूरी है आपकी सहभागिता आपका प्रयास ।जिस तरह एक बच्चा गिरता है उड़ता है फिर संभल कर चलता है एकदम से ,यकायक नहीं सीखता है और असफलताओं से घबराकर पुनः प्रयास करना बंद नहीं करता उसी तरह सभी अवस्था में सभी विद्यार्थियों को यह संदेश है की असफल होने पर कोई अनुचित कदम ना उठाएं निश्चित ही सफलता आपके कदम चूमेगी क्योंकि निश्चित तौर पर लगातार परिश्रम का फल जरूर मिलता हैl

“”कुछ करने के लिए

मौसम नहीं मन चाहिए ,

साधन सभी जुट जाएंगे

संकल्प का धन चाहिए ।

और अंत में मैं शिक्षकों के सबसे बड़े संघ छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की प्रान्तीय महामंत्री होने के नाते सरकार से यह अपील करती हूं, कि जिस तरह बच्चों का अधिकार बच्चों को शिक्षा का अधिकार है उसी तरह शिक्षकों को भी उनके समस्त अधिकार प्राप्त होने चाहिए शिक्षकों को शिक्षा कर्मी ,संविदा शिक्षक, नियमित शिक्षक, इन सब बंधनों से मुक्त कर सभी शिक्षकों को शिक्षक नाम देना चाहिए सभी शिक्षकों का पूर्णतया संविलियन कर शिक्षक नाम को चरितार्थ करें एवम शिक्षकों की सभी माँगो संविलियन ,क्रमोन्नती, पेंशन ,अनुकम्पा नियुक्ति और वेतन विसंगति आदि पर विचार कर पूरा करें। इससे समस्त शिक्षकों का आत्मविश्वास जागृत होगा और उन्हें पूरे जोश के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।


अंजुम शेख
प्रांतीय महामंत्री
छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन 72763

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