73 वर्षिय नौजवान सालाना लिख रहे हिन्दी किताब

एजुकेशन छत्तीसगढ़

रायपुर। किसी को कुछ कर गुजरने की चाह हो तो उम्र मायने नही रखता । उम्र चाहे जो भी हो लेकिन हमारी सोच सकारात्मक और जवा रहे तो बढ़ती उम्र में कामयाबी हासिल करने से कोई रोक नही सकता । ऐसे ही युवा सोच रखने वाले 73 वर्षीय एक नौजवान ने हिन्दी किताब लेखन में सफलता हासिल की है और आगे भी रचना कर रहे । लेखन की दीवानगी इस कदर की साल दरसाल किताब रचना रहे है। इनका सुबहों शाम किताब रचना में बीत रहा । जिन्होंने अपना जीवन हिन्दी किताब रचना में समर्पित किया है। जिस उम्र में लोग आराम फरमाना पसंद करते है उस उम्र में शब्दों की जादूगरी वाकई काबिले तारीफ है । हिन्दी दिवस के अवसर पर हम आपको ऐसे ही जुझारू कवि लेखक राजिम निवासी प. पवन पौराणिक के बारे में बताने जा रहें है वैसे तो इनको स्कूली शिक्षा के दौरान से ही लिखने पढ़ने में खूब रुचि था । पाठ्य पुस्तक की कविता कहानी से प्रभावित होकर लेखन कार्य में रुचि जागा ,लेकिन लेखन के क्षेत्र में शिक्षकों का मार्गदर्शन नही मिलने पर पिछड़े जरूर लेकिन हिम्मत नही हारे । शिक्षा के दौरान इनकी मुलाकात एक जोतिषी से हो गई । पौराणिक ने जोतिषी से कहा मेरी रुचि लेखन में है। हस्तरेखा देखकर जोतिषी ने कहा तुम्हारे भाग्य में ऐसा कुछ भी नही। यह सुनकर पौराणिक को बहुत दुख हुवा । फिर लेखन कार्य उन्होंने छोड़ दिया । इसके बाद उन्होंने परिवाहन विभाग में नौकरी जॉइन कर ली। शासकीय कार्यो से सेवानिर्वित होकर 1984 में प्रजापति ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में छात्र के रूप में प्रवेश लिया ।पौराणिक की लेखन यात्रा ब्रम्हाकुमारी आश्रम से प्रारम्भ हुई । इन्हें आध्यात्म ज्ञान से प्रेरणा मिली । जीवन के अनुभवों विचारों और गहन अध्यन कर हृदय स्पर्श कहानी कविता की रचना कर रहे है।

इनकी प्रमुख रचनाये : प .पवन पौराणिक स्कूली शिक्षा के दौरान से ही लिखते चले आ रहे हैं । पहली लेखन मैट्रिक परीक्षा के बाद टूटे वीणा के तार कहानी लिखी। यह हिन्दी साहित्य समिति के सदस्य भी रहे है। कॉलेज शिक्षा में लघु काव्य संकलन रजनी हायी में वीर रस के कवि थे। पौराणिक ने लम्बे समय तक परिवाहन विभाग में अविभाज्य मध्यप्रदेश के दौरान शासकीय सेवाएं दी। हालांकि इस बीच शासकीय कार्यो में व्यस्त होने की वजह से किताब लेखन में दूरी जरूर बनी ।सेवानिर्वित के पश्चात इन्होंने फिर कलम पकड़ ली और सतत किताब रचना कर रहे जिसमें पुस्तक,वय: से वैराग्य भाग एक,दो, तीन और चतुर्थ हिन्दी किताबों का प्रकाशन हो चुका है । पौराणिक बहुभाषी है हिन्दी के अलावा अंग्रेजी भाषा में अच्छी पकड़ है हिन्दी प्रिय होने की वजह से इनकी सभी रचनाये हिंदी में है । इसके अलावा कई कविता छत्तीसगढ़ी में है जैसे राजिम दाई, विदाई गीत मोर सोना बेटी, आँखी के पुतरा आदि। पौराणिक की पुस्तकें भारत में ही नही बल्कि अमेरिका, यूक्रेन जैसे देशों में पढ़ी जा रही । फिलहाल इनकी किताबें रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय ,वनवासी विकास समिति शबरी आश्रम ,ब्रम्हाकुमारी आश्रम,मंत्रालय, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला राजिम ,आनंद समाज के ग्रंथालयों में उपलब्ध है ।

निस्वार्थ किताब रचना : दुनियाभर में कई मशहूर लेखन कवि अपनी रचनाये प्रकाशित करते है अमुनन इनका उद्देश्य आर्थिक लाभ कामना है । जिसमें प.पवन पौराणिक की रचनाये निस्वार्थ है। इन्होंने अपनी किताब प्रकाशन में तन मन धन तीनों समर्पित किया है। पौराणिक वर्तमान में कुशाल पुर ,विनोभावे नगर स्थित ब्रम्हाकुमारी गीता पाठशाला केंद्र के संचालक है। यह प्रति वर्ष किताब लिखकर किताबें ब्रम्हाकुमारी आश्रम ये दान करते है। किताब से अर्जित धन का उपयोग आश्रम के सेवा कार्यो में किया जाता है।

किताब अध्ययन के फायदे: किताब ज्ञान का सागर है आप जितना किताब पढेंगे आप उतने ज्ञानी होंगे। पौराणिक की किताबें अध्यात्म ज्ञान से परिपूर्ण है । यह मानव को जीवन जीने की राह को बतलती है । सकारात्म दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है और नकारात्मकता को खत्म करती। मन की शुद्धि और शांति के लिए यह पुस्तक लाभप्रद है।

इन्होंने दिया साथ: किताब रचना में पवन पौराणिक की धर्मपत्नी करुणा शर्मा ने किताब लेखन में उत्साह वर्धन कर पूरा सहयोग किया है। पुरोहित अपनी कामयाबी का श्रेय शिव बाबा के साथ ही धर्मपत्नी को मानते है।

जब तक साँसे रहेगी तब तक लिखता रहुगा: दृढ़संकल्प इच्छा शक्ति लिए जब एक उम्रदराज लेखक अपनी उम्र के पड़ाव को भूलकर सतत किताब लिख रहे और कहते है जब तक सांसे रहेंगी तब तक लिखता रहुगा।

हिन्दी दिवस के इस मौके पर 73 वर्षीय नौजवान को न्यूज़ 27 की तरफ से सलाम है।

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