1524 दीप ज्योति से जगमगा रहा दंतेश्वरी माई का दरबार

धर्म

रायपुर. नगर निगम वार्ड क्रमांक 64 वामन राव लाखे पुरानी बस्ती में स्थित मा दंतेश्वरी मंदिर में नवरात्र के मौके पर श्रद्धालु दूर दराज से दर्शन के लिये आते है .माता रानी अपने भक्तों की मुराद सुन देती है, बुरी बला दूर कर देती. वैसे तो बारह महीनें माता रानी के दरबार में भक्तों का रेला लगा रहता है . बता दे अजीवन दीप ज्योति 50 भीत में दो एवं नवरात्र विशेष में 1472 दीप प्रज्वलित हो रही है. कुल मिलाकर 1524 दीपज्योति रोशनी से माता रानी के दरबार में जगमगा रहे हैं.

किवदंती. रायपुर पुरानी बस्ती में विराजित भू फुट मां दंतेश्वरी मंदिर 1400 ईस्वी पुराना है, मंदिर की प्राचीन कहानी है. बताया जाता है कलचुरी राजवंश के दौरान पुरानी बस्ती वृहण जंगल हुआ करता था. जहां जंगली जीवों का बसेरा था. जंगल परीक्षेत्र में ग्वाला चरवाहा था. माता रानी ने स्वपन्न में ग्वाले को दर्शन दिए व उत्पत्ति स्थल की जानकारी दिया, जिसे प्रसार के लिये मना किया . इसके बाद ग्वाला विचलित हो गया. विचलित देख ग्वाले पत्नी ने परेशानी की वजह पति श्री से पूछा तो उन्होंने स्वपन्न दर्शन बताया जिससे ग्वाले की मृत्यु हो गई. ग्वाले पत्नी ने सारी घटना ग्रामीण जनों को बताया. यह सुन उत्पत्ति स्थल की खुदाई करने पर भूगर्भ से पाली भाषा में शिला लेख व माता रानी की प्रतिमा मिली. यहां माता रानी के मुख से रक्त बहने लगा जिसके दंत बाहर निकले हुए थे. माता रानी की उत्पति के बाद गाय के थन से दूध निकलने लगा. यह अद्भुत चमत्कार था, जिसे मां दंतेश्वरी कहा गया.

यादव रहते हैं पुजारी: दंतेश्वरी मंदिर में पुराने समय से ही यादव पुजारी पूजा करते आ रहे हैं. वर्तमान में मंदिर के पुजारी रामनाथ यादव है.

मंदिर में इनका रहा सहयोग. स्वर्गीय चेतन सिंह ठाकुर ने माता रानी के चरणों में अपना जीवन अर्पित कर दिया. इनका मंदिर में विशेष योगदान रहा इसकी बदौलत मंदिर का विकास संभव हुआ.

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