दशहरे के दिन यहां रावण की पूजा की जाती है

धर्म

रायपुर. असत्य पर सत्य की जीत के उपलक्ष पर विजय दशमी का त्योहार मानते है. भगवान राम ने रावण को मारकर सीता को लंका से मुक्त किया था. विजय दशमी के दिन पुरे भारत में रावण का पुतला दहन किया जाता है .लेकिन देश में कई ऐसे राज्य है जहां रावण को कभी नही जलाया जाता. अगर कही रावण को जलता देख लिया तो दुख व्यक्त करते है. रावण को देवतुल्य मानकर उसकी पूजा की जाती है. कहते है रावण अंहकारी था तो उसमें कई अच्छी खुबिया भी थी. इनकी अच्छी खुबिया की वजह से देश के कई प्रदेश में रावण के मंदिर है जहां उनको कुलदेवता भी माना जाता है.

मध्यप्रदेश : विदिशा जिले में रावण का प्राचीन मंदिर है जिसके कारण गांव का नाम भी रावण रखा गया. यहां रावण की सोये हुवे 10 फिट की प्रतिमा है. बल्कि दशानन को रावण बाबा मानकर इसकी पूजा की जाती है. किसी भी पूजा हवन अनुष्ठान में रावण के नाभि में तेल डालकर उसमें से लिया जाता है. जब भी कोई शुभ कार्य करने जा रहे हो तो रावण बाबा के मंदिर के निकट पूजा अर्चना कर ली जाती है. यहां तक की नई गाड़ी में स्वास्तिक चिन्ह की तरह रावण का नाम लिखा जाता है. रावण को यहां कुल देव माना जाता है.

कानपुर के शिवाला शहर के बीच में शिवाला स्थित कैलाश मंदिर में रावण का प्राचीन मंदिर है यहां रावण के साल में एक बार ही दर्शन होते हैं. दरअसल यहां का पट साल में एक बार खुलने की वजह से काफी श्रद्धालु आते हैं. दशानन मन्दिर का पट दशहरे के दिन खुलता है। इस मंदिर में दशहरे के दिन रावण की पूजा अर्चना की जाती है.

आंध्र प्रदेश : रावण शिव का अनन्य भक्त था. रावण ने आंध्र प्रदेश के काकिनाड में एक शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां मछुवारा समुदाय के लोग शिव और रावण दोनों को मानते हैं. यहां एक ही मंदिर में शिव और रावण दोनों की पूजा की जाती है.

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बैजनाथ के बिनवा पुल के पास रावण का मंदिर है। रावण ने यहीं भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की थी। शिव मंदिर के पूर्वी द्वार में खुदाई के दौरान एक हवन कुंड भी निकला था, इस कुंड के समक्ष रावण ने हवन कर अपने नौ सिरों की आहुति दी थी। मान्यता यह भी है कि इस क्षेत्र में रावण का पुतला जलाया गया तो उसकी मौत निश्चित है। रावण ने बैजनाथ में भगवान शिव की तपस्या कर मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था।

उत्तरप्रदेश के ग्रेटर नोयडा जिले के बिसरख गांव में भी रावण का मंदिर है, इस गांव का नाम पहले विश्वेशरा था जो रावण के पिता विश्रवा के नाम पर पड़ा था। अब इस गांव को बिसरख के नाम से जाना जाता है, यह गांव गाजियाबाद शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर है. यहां ऐसी मान्यता है कि यहा रावण का ननिहाल था। नोएडा के शासकीय गजट में रावण के पैतृक गांव बिसरख के साक्ष्य मौजूद नजर आते हैं।

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