कंकाली मठ 365 दिन में दशहरा के दिन खुलता है कीजिए दर्शन

धर्म

रायपुर.देश में कई ऐसे मंदिर है जिसका पट किसी विशेष दिन में खुलता है. आम तौर पर मंदिरों के पट दिन भर खुला रहता है या दिन में खोले जाते है .लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ऐसा लौता मंदिर है जिसका पट रात्रि में खुलता है और दूसरे दिन ही रात्रि में ही बंद होते है. पट नवरात्री नवमीं के दिन सोमवार मध्य रात्रि से मंगलवार दशहरा के मध्यरात्रि तक खोला गया है .आज रात के 12 बजते ही पट बंद कर दिया जाता है. समय के साथ खुलना ओर बंद होना देवीय अनुशासन को बताता है. समय के मद्देनजर नजर रखते हुवे श्रद्धालु सोमवार को राजधानी स्थित ब्राह्मण पारा के कंकाली मठ खुलते ही श्रद्धालुओं दर्शन के लिए उमड़ पड़े. दरअसल साल भर में दशहरे के दिन खुलने वाला पट का श्रद्धालुओं को लंबे समय से इंतजार करते है. यहां अन्य प्रदेशों से भी कंकाली मठ के दर्शन के लिए उपस्थित रहे . मन्नतों के अनुसार नारियल बांधे गये . मुराद पुरे होने के बाद नारियल खोल लिए जाते है. कंकाली मठ में कई सहस्य छुपे है. यहां अस्त्र शास्त्रों की पूजा विधि विधान से की जाती है . मठ में तलवार ढाल, फरसा आदि अस्त्र शस्त्र है जो सिर्फ पूजा योग्य है. दशहरा के दिन अस्त्र शस्त्र का श्रृंगार किया जाता है. इस दिन कंकाली माता मंदिर से कंकाली मठ में विराजति है. माता इस दिन भक्तों की हर मुराद पुरी करती है.

कंकाली मठ में नागा साधुवों के अस्त्र शस्त्र है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि 13 वी शताब्दी में नागा साधु यहां आये थे. कंकाली मठ नागा साधुओं के लिए सुरक्षित स्थान था. यहां वह अपनी सुरक्षा के लिए अस्त्र शास्त्र रखते थे. इनकी मृत्यु के पश्चात इनकी स्मृति में अस्त्र शस्त्र कंकाली मठ में रख दिया गया. पहले कंकाली देवी का मंदिर कंकाली मठ में हुवा करता था. फिर देवी के इच्छा अनुसार स्थान परिवर्तन कर कंकाली पारा कंकाली तालाब के निकट स्थापित किया गया. कंकाली मठ में नवरात्री नवमीं की मध्य रात्रि से दशहरा के मध्य रात्रि तक माता कंकाली मठ में विराजति है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *