आशीष वाली दिए और मोमबत्ती से जगमग हुए झरगांव के घर-आंगन,गलियां

छत्तीसगढ़

गायों की पूजा के बाद खिलाये दोकड़ी और झोझिया लड्डू

जशपुर ।जिले के झरगांव में दीप पर्व और गोवर्धन पूजा में आशीष वाले मिट्टी के दिए और मोमबत्ती को प्रज्वलित कर घर आंगन,गांव की गलियों और गौठान को जगमग करने की अनूठी परंपरा वर्षों से चली आ रही है। शत-प्रतिशत ईसाईं समुदाय वाले इस गांव में दीपावली के दिन सभी लोग संध्या 4 बजे के आसपास थाल में मिट्टी का दिया-बाती, तेल और मोमबत्ती तथा प्रसाद के रूप में उबला शकरकंद लेकर चर्च जाते हैं और वहां आशीष दिलाकर अपने घर लौटते हैं। यही आशीष वाले दिए और मोमबत्ती का उपयोग दिपावली की रात और गोवर्धन पूजा के अवसर पर घर आंगन और गौठान को रोशनी से जगमग करने के लिए किया जाता है।

गांव की सरपंच अंजना मिंज बताती हैं कि चर्च से आशीष प्राप्त दिए को घर आंगन और गौठन में प्रज्वलित करना उनके गांव की वर्षों पुरानी परंपरा है। गांव के लोग बड़ी श्रद्धा से इस परंपरा का निर्वहन करते हैं और इसको शुभ मानते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष गोवर्धन पूजा गांव के गौठान में सामूहिक रूप से की गई। यहां हर घर से लोग आशीष वाले दिए और मोमबत्ती प्रसाद के रूप में चावल और उड़द का बना दोकड़ी और झोझियां लड्डू, झोरंगा दाल और उबला चना लेकर पहुंचेे थे। सभी ने मिलकर गायों और बैलों को स्नान करया गया। पांव पखारेे,ं गायों और बैलों के सिर और पैर में तेल का लेप किया।  फूल-माला पहनाकर पूजा अर्जना की और गायों को उबलाश्शकरकंद, दोकड़ी और झोझियां लड्डू,  खिलाए और स्वंय भी प्रसाद के रूप में खाया।

गौठान में गोवर्धन पूजा का उत्सव बड़ी धूम-धाम  से मनाया गया । गौठान समिति के अध्यक्ष श्री फिलिप टोप्पो और सदस्य श्री रोनाल्ड टोप्पों ने बताया कि गौठान  में पंरम्परागत गीत और नृत्य  का कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। जिसमें सभी ग्रामीणों ने भाग लिया। अलग-अलग टोलियों में मादर की थाम पर देर शाम तक कर्मा किए।  इस बीच पूरे गौठान में दिए और मोमबत्ती प्रज्जवलित कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की गई।

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