अगहन गुरुवारी पूजा करने से परिवार में मिलती है सुख- समृद्धि: पंडित शंकरानंद शर्मा

छत्तीसगढ़

“गीता में स्वयं भगवान ने कहा है “

मासानाम् मार्गशीर्षोऽयम्।

मार्गशीर्ष मास को हिन्दू पंचांग के अनुसार अगहन मास भी कहा जाता है। यूं तो हर माह की अपनी विशेषताएं है… लेकिन मार्गशीर्ष का सम्पूर्ण मास धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है।अगहन मास के सभी गुरुवार को यह पूजा की जाएगी। गुरुवारी पूजा मां महागौरी धन की देवी लक्ष्मी की आस्था में की जाती है ! परिवार की समृद्धि कुशलता के लिए यह पूजा की जाती है । पंडितों के अगहन मास के सभी गुरुवार को पूजा करने से विशेष फल मिलता है। छत्तीसगढ़ में इस को विशेष महत्व दिया जाता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार इस महीने मां लक्ष्मी बैकुंठधाम से आकर पृथ्वीलोक में विचरण करती हैं और विशेष कर ऐसे घर का आतिथ्य स्वीकार करती हैं, जहां पूरे घर की साफ सफाई के साथ सच्चाई, ईमानदारी, आध्यात्मिकता का माहौल हो। गुरुवार को मां लक्ष्मी का वार माना जाता है, लिहाजा पूरे मास घर घर नए चावल के आटे का घोल बनाकर घर के द्वार से लेकर सभी कमरों पूजा स्थल तक मां लक्ष्मी के पद चिन्ह बनाकर, गुरुवार की भोर में ही घर के दरवाजे खोलकर मां लक्ष्मी के आगमन की कामना से पूजा की जाती है। दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। यह परंपरा गुरुवार को निभाई जाएगी।गुरुवार के दिन हर घर में मां लक्ष्मी की पूजन होता है । हर घर में मां लक्ष्मी की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है । हर घर के द्वार पर दीपों से रोशनी की जाती है ।इस वर्ष अगहन (मार्गशीर्ष मास) कृष्ण पक्ष की सप्तमी को पहला गुरुवार पड़ रहा है। पूजा की तैयारी बुधवार की शाम से ही शुरू कर दी जाती है ।इस वर्ष अगहन (मार्गशीर्ष मास) कृष्ण पक्ष की सप्तमी को पहला गुरुवार पड़ रहा है। पूजा की तैयारी बुधवार की शाम से ही शुरू कर दी जाती है ।इन अल्पनाओं में मां लक्ष्मी के पांव विशेष रूप से बनाए जाते है । शाम होते ही मां लक्ष्मी के सिंहासन को आम, आंवला और धान की बालियों से सजाया जाता है और कलश की स्थापना कर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है ।इसके बाद गुरुवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही मां लक्ष्मी की भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना की जाती है । इसके बाद उन्हें विशेष प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है !ऐसी मान्यता है कि अगहन महीने के गुरुवारी पूजा में मां लक्ष्मी को प्रत्येक गुरुवार को अलग-अलग पकवानों का भोग लगाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। गुरुवार को पूजा-अर्चना के बाद शाम होते ही प्रसाद खाने के लिए विशेष रूप से निमंत्रण दिया जाता है। बुधवार शाम से लेकर गुरुवार की शाम तक गुरुवारी पूजा की धूम रहती है ।

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