भाजपा की नक्शे कदम पर चल रही है प्रदेश की कांग्रेस सरकार:तेजराम विद्रोही

राजनिति

रायपुर।छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने 2500रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी करने के नाम पर गुमराह किया है। पहले तो बरसात का बहाना बनाकर खरीदी की तारीख 15 नवंबर से बढ़ाकर 1 दिसम्बर कर दिया जो किसानों को अपनी उपज बेचने में 15 दिन देर हो गया है जिससे किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने मंडियों में व्यापारियों को औने पौने दाम पर उपज बेचने मजबूर हो गए। दूसरी ओर भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा केन्द्रीय पूल का चावल नहीं खरीदने की बात को लेकर कांग्रेस अपनी राजनीति करने लगे वहीं भाजपा भी किसानों की धान खरीदी के मामले पर राजनीति कर रही है । दोनों ही पार्टियों की राजनीतिक नूरा कुश्ती का खामियाजा आखिकार किसानों को ही भुगतना पड़ रहा है।

उक्त आशय की प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि राज्य सरकार को जब 1815 रुपये और 1835 रुपये की दर से ही समर्थन मूल्य में धान खरीदी करना ही था तो स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए क्यों 2500 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की बात किया। पूर्व की भाजपा सरकार 2013 में वायदा किया था कि हम पाँच साल तक किसानों को 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देंगे, लेकिन वह नहीं दे पाया। 2014 में जब भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सत्ता में आया तब राज्य की रमन सिंह सरकार को कहा कि यदि आप धान खरीदी पर बोनस दोगे तो हम मदद नहीं करेंगे जिसका परिणाम यह हुआ कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने धान खरीदी की मात्रा ही कम कर 10 क्विंटल कर दिया था जिसको प्रदेश में किसान आंदोलन के चलते 14 क्विंटल 80 किलो प्रति एकड़ खरीदी किया गया। आज कमोबेश उसी नक्शे कदम पर चलते हुए राज्य में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार किसानों की विश्वास के साथ खेल रहे हैं। एक ओर जहाँ धान खरीदी की व्यवस्था ठीक तरह नहीं हो पायी है तो दूसरी तरफ दैनिक जरूरतों के लिए किसान औने पौने दाम पर अपना उपज बेचने मजबूर हो रहे हैं। ऐसे स्थिति में राज्य सरकार द्वारा यह कहना कि समर्थन मूल्य 1815 रुपये और 1835 रुपये में ही धान खरीदी होगी और बाद में अंतर की राशि बोनस के रूप में दिया जायेगा। तो राज्य सरकार यह क्यों प्रचार किया कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को उनके धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल दे रही है। यह किसानों को गुमराह करने वाली बात है। यह वैसा ही प्रतीत हो रहा है जैसे पूर्व की सरकार ने किया था।

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