महिलाओं के प्रति बढ़ता अपराध और लापरवाह प्रशासन

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नम्रता । दिल्ली

क्या व्यवस्था इतनी गहरी नींद में सो रही है कि दरिंदों से जूझती लड़कियों की चीखें उसे सुनाई नहीं देती ? क्या रुदन चीत्कारें और कराहती आवाज सत्ता और जिम्मेदार प्रशासन के कानों तक पहुंचती ही नहीं ? या “self defence” का प्रशिक्षण देने का दावा करने वाली सरकारों ने यह मान लिया है कि अब लड़कियां इतनी सशक्त हो चुकी है कि उन्हें सुरक्षा की जरूरत ही नहीं,वो खुद ही लड़ लेंगी अपनी लड़ाई और कर लेंगी अपनी सुरक्षा. ठीक है ..उन दरिंदो से वो लड़ती-भिड़ती भी है,वो सब उपाय करती है जो शायद उसने “self defence ” के लिए सीखा भी हो पर चार वहशियों के दबोचे से निकलना सत्ता के उस मंत्री के लिए भी आसान नहीं जिन्हें पुलिस को फोन करने में ही सुरक्षा दिखाई देती है. पुलिस जो आज तक “यह हमारे एरिया में नहीं आता , दूसरे थाने जाओ” कह कर ऐसे कई केस “टरका” चुकी है. दिल्ली के निर्भया केस के कुछ महीनों बाद तक यह लगा था कि शायद अब सूरत बदलेगी पर कुछ ही महीनों बाद 3 वर्ष की मासूम “गुड़िया” के साथ हुए वीभत्स अपराध ने रोंगटे खड़े कर दिए . दिल्ली से लेकर हैदराबाद तक कुछ नहीं बदला. गुरुवार को महिला डॉक्टर के साथ हुए जघन्यतम अपराध ने देश को स्तब्ध कर दिया. नारियों को पूजने वाले इस देश को आज अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है. एक लड़की रात के नौ बजे भी अपने शहर में महफ़ूज नहीं और हर सरकार “बेटी-बचाओ और बेटी पढ़ाओ ” का झुनझुना बजा रही है. क्या कारण है कि ऐसे दुष्कृत्य बार बार होते है ?शायद दुष्कर्मियों के हौसले इसलिए भी बुलंद है क्योंकि भारत में इतनी आसानी से दोषियों को सजा नहीं मिलती है. यहां तो निर्भया केस के अपराधियों की फांसी पर भी पुनर्विचार होगा.
महिला डॉक्टर की साथ हुई बर्बरता के बाद भी अगर सत्ता और जिम्मेदार व्यक्तियों/प्रशासन ने ” सुरक्षा” जैसे बेहद बुनियादी और सबसे जरूरी पहलू पर गंभीरता नहीं दिखाई तो व्यवस्था के लिए इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता. महिला सुरक्षा के मोर्चे पर असफल रहने वाले देश के लिए विकास के बाकी सारे दावे झूठ है.
“तुम्हारे राज में कुछ भी ठीक नहीं
कोई महफ़ूज नहीं ,कोई महफ़ूज नहीं “
सवाल तो उस समाज से भी है जिन्हें इन बलात्कार की घटनाओं के पीछे “लड़कियों ने छोटे कपड़े क्यों पहन रखे थे”, ” देर रात आखिर वह निकली ही क्यों,ऐसा तो होना ही था” जैसे कारण दिखाई देते है. कभी-कभी लगता है कि हमारी सामाजिक चेतना ही गर्त में चली गई है. ऐसे दुष्कर्मों को अंजाम देने वालों में ऐसी दरिंदगी और वहशीपन आता कहाँ से है? क्या किसी लड़की को सरेराह घूरते हुए , उसके साथ बर्बरता की हद तक जाकर दुष्कर्मों को अंजाम देने और उसके बाद जला देने के दौरान क्या एक बार भी तुम्हें अपनी बहन का चेहरा याद नहीं आता, क्या तुम यह भूल जाते हो कि इसकी जगह अगर तुम्हारी मां,बहन,प्रेमिका, पत्नी या दोस्त हो तब……….

लड़कियों सावधान रहो!
मानव का मुखौटा पहने यहां कई दरिंदे घूम रहे है.

1 thought on “महिलाओं के प्रति बढ़ता अपराध और लापरवाह प्रशासन

  1. Jurm to jurm hotta,, jesse dr Priyanka k saath hua,,dukh ki baat hei hamare bharat mei ladkiya, baachi safe nahi hei.. Rapist logo ko bhi jinda jala dena chahiye,,,, dropar yug mei jesse dropati k saath hua mahabhaart hua, aur treta mei ravan ka dhehan hua…. Ab mei aur uss samay mei anter aagya,,, ab to mom k diye jala te hei, new trend… ..mei to yahi chahti,, saza kdi se kdi honi chahiye,, uss ladki ko kitna taklif hua hogga,, wese he.. Rapist ko jinda jala dena chahiye,,,

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